ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद बाराबंकी के किंतूर गांव में गम और गुस्सा
Iran and Israel conflict: आदिल काजमी ने इजरायल और अमेरिका के हमलों को विश्व स्तर की गुंडागर्दी और आतंकी घटना करार देते हुए कड़ी निंदा की।

बाराबंकी में अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की सूचना के बाद गमगीन उनके खानदान के लोग
HighLights
खामेनेई के निधन की खबर से किंतूर में शोक, ईरान के हालात पर चिंता
हमलों की निंदा, ईरान और भारतीयों की सलामती के लिए दुआ
1979 की इस्लामिक क्रांति के नायक के पूर्वजों का संबंध अवधी क्षेत्र से
किंतूर में कभी 550 घरों का था खामेनेई खानदान
जागरण संवाददाता, बाराबंकी। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की सूचना के बाद से जिले में सिरौलीगौसपुर के किंतूर गांव में गम और गुस्सा है। बाराबंकी में भी शोक की लहर है।
अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की सूचना के बाद गांव के लोगों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए ईरान में रह रहे भारतीयों और आम नागरिकों की सलामती के लिए दुआ की। इसके साथ ही इजरायल और अमेरिका की ओर ईरान पर हमलों की कड़ी निंदा की गई।
बाराबंकी के सिरौलीगौसपुर तहसील के किंतूर गांव में रविवार तड़के जैसे ही इंटरनेट मीडिया के जरिए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की सूचना मिली तो गांव के लोग स्तब्ध हो गए। गांव में शोक का माहौल छा गया।
स्थानीय निवासी आदिल काजमी ने बताया कि सूचना मिलते ही लोग गमजदा हो गए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम लीडर की मौत का गम बहुत है। हम सभी शोक मना रहे हैं और ईरान में रह रहे लोगों, खासकर भारतीयों की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं।
आदिल काजमी ने इजरायल और अमेरिका के हमलों को विश्व स्तर की गुंडागर्दी और आतंकी घटना करार देते हुए कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह इंसानियत को शर्मसार करने वाला मंजर है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
गांव के निहाल अहमद काजमी सहित अन्य लोगों ने भी गहरा शोक व्यक्त किया। उनका कहना है कि ईरान में बदलते हालात को लेकर किंतूर के लोगों के चेहरों पर चिंता साफ देखी जा सकती है। ग्रामीणों ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सबसे जरूरी है कि वहां रह रहे भारतवासी और आम ईरानी नागरिक सुरक्षित रहें।
बाराबंकी से अयातुल्ला खामेनेई का संबंध
ईरान-इजरायल तनाव के बीच बाराबंकी का किंतूर गांव एक बार फिर चर्चा में है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के नेता रुहोल्लाह अयातुल्ला खामेनेई के पूर्वजों का संबंध इसी गांव से बताया जाता है। स्थानीय परिवारों के अनुसार, खुमैनी का खानदान वर्षों पहले यहां से ईरान गए थे, लेकिन उनकी जड़ें आज भी अवधी की इस माटी से जुड़ी मानी जाती हैं।
रुहोल्लाह अयातुल्ला खुमैनी का पारिवारिक इतिहास उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के किंतूर गांव से जुड़ा है। परिवार के सदस्यों के अनुसार खुमैनी के पूर्वज अवधी क्षेत्र से ईरान के निशापुर शहर जाकर बस गए थे। खुमैनी के दादा सैयद अहमद मुसवी का संबंध किंतूर गांव से था।
खामेनेई परिवार के जानकार सैयद निहाल अहमद काजमी के अनुसार उनके पूर्वज कई सौ वर्ष पहले ईरान से भारत आए और फिर 19वीं सदी में वापस ईरान चले गए। वर्ष 1830 के आसपास अहमद मुसवी हिंदी, अवध के नवाबों के साथ कर्बला जियारत पर गए और वहीं से ईरान के खुमैनी शहर में जाकर बस गए।
इसी शहर के नाम पर आगे चलकर परिवार को ‘खुमैनी’ कहा जाने लगा। कहा जाता है कि खुमैनी के पिता सैयद मुस्तफा मुसवी भी भारत से जुड़े रहे। ईरान में बसने के बावजूद परिवार अपने नाम के साथ ‘हिंदी’ शब्द का प्रयोग करता था, जो उनके भारतीय मूल की पहचान माना जाता है।
1979 में ईरान में शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासन के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करते हुए रुहोल्लाह अयातुल्ला खामेनेई ने इस्लामिक गणराज्य की स्थापना की। 1989 में उनके निधन के बाद अयातुल्ला अली खामेनेई ने सर्वोच्च नेता का पद संभाला। ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में खुमैनी और उनके विचारों का गहरा प्रभाव माना जाता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि किंतूर गांव में कभी ‘खुमैनी’ या ‘मुसवी’ खानदान के करीब 550 घर हुआ करते थे, जिन्हें ‘सैयदवाड़ा’ के नाम से जाना जाता था। समय के साथ अधिकांश परिवार अन्य स्थानों पर बस गए और अब यहां पांच से सात घर ही शेष हैं। हालांकि, आज भी इस वंश का नाम इलाके में सम्मान के साथ लिया जाता है।
लखनऊ के पुराने करामत हुसैन मुस्लिम गर्ल्स डिग्री कालेज की स्थापना में भी इस परिवार की भूमिका बताई जाती है। स्थानीय लोग इसे बाराबंकी के इतिहास और गौरव से जुड़ा प्रसंग मानते हैं। ईरान में जारी मौजूदा हालात के बीच किंतूर गांव का यह ऐतिहासिक संबंध एक बार फिर सुर्खियों में है।
