लखनऊ, जेएनएन। केजीएमयू में ऑनलाइन सिस्टम में झोल ही झोल है। यहां कंप्यूटरीकृत रसीदों में जहां घपला हो रहा है। वहीं वार्डो में भर्ती मरीजों को सिस्टम पर दर्शा नहीं रहा है। केजीएमयू में 4400 के करीब बेड हैं। यहां मरीजों की कंप्यूटरीकृत भर्ती की जाती है। इन मरीजों को आइपीडी इन भी किया जाता है। मगर इन्हें वार्ड में कौन सा बेड आवंटित है, किस पर भर्ती हैं। यह सब गायब रहता है। इसका खुलासा चिकित्सा अधीक्षक के पत्र से हुआ। उन्होंने तीन जून को पत्र लिखकर व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में बेड पर भर्ती मरीज की ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध न होने से दिक्कतों का हवाला दिया गया है। वहीं आइटी सेल महीनों से पहले भर्ती से लेकर बेडों की उपलब्धता ऑनलाइन होने का दावा कर चुका है। ऐसे में कंप्यूटर पर वार्ड में भर्ती किए गए मरीज ऑनलाइन गायब रहते हैं।

वायरस के बाद अब एबॉर्ट का तर्क

केजीएमयू घपला छिपाने के लिए हर रोज नित नए तर्क गढ़ रहा है। पुराने वित्तीय वर्ष की रसीदें नए वित्तीय वर्ष में कटने पर जहां वायरस को दोषी ठहराया, वहीं 24 घंटे में कटने वाली हजारों रसीदें एक मिनट में कटने पर ‘एबॉर्ट’ होना करार दिया है।

उधर, सवाल यह है कि ई-हॉस्पिटल के तहत देशभर के 400 अस्पताल कनेक्ट हैं। वहीं यूपी के 42 अस्पताल एनआइसी के इसी सॉफ्टवेयर पर रन हो रहे हैं, लेकिन वायरस और एबॉर्ट सिर्फ केजीएमयू में ही क्यों हो रहा है। स्थिति यह है कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट पर एकेटीयू के सदस्य ने हस्ताक्षर से ही इन्कार कर दिया। वहीं अब तीन सदस्यीय कमेटी से जांच का दावा किया जा रहा है, जबकि बाहरी एजेंसी से जांच कराने से कुलपति खुद इन्कार कर चुके हैं।

ये सवाल बरकरार

  • वायरस ने जब कंप्यूटर के डाटा बेस पर अटैक किया तो पूरा डाटा नष्ट क्यों नहीं हुआ। वहीं आगे की रसीद छपना कैसे जारी रहा
  • वायरस अटैक का वास्तविक मतलब डाटा नाट फाउंड या डाटा करप्ट है। यह किसी कर्मी द्वारा रिपोर्ट क्यों नहीं किया गया
  • एनआइसी द्वारा वायरस अटैक की रिपोर्टिग क्यों नहीं की गई
  • देश के 400 व यूपी के 42 हॉस्पिटल इसी सॉफ्टवेयर पर हैं, अन्य में दिक्कत क्यों नहीं हुई
  • वायरस अटैक के बाद रसीद जेनरेट होना ठप हो जाएगी, जब तक डाटा बेस की रिपेरिंग नहीं होगी। बावजूद, रसीदें कैसे जारी होती रहीं
  • वायरस अटैक से शुरुआत से लेकर अंत तक डाटा नष्ट होता है, सिर्फ चुनिंदा रसीदें नहीं
  • एनआइसी का सर्वर करोड़ों की लागत से बना है, इसके वायरस सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध है। ऐसे में केजीएमयू में ही वायरस के घालमेल पर सवाल उठना लाजिमी है।

 

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Posted By: Divyansh Rastogi

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