लखनऊ, जेएनएन। मरीज में कोविड के लक्षण आए तो पहले वह जांच के लिए भटके स्वामी विवेकानंद पॉलीक्लीनिक में जांच कराई मगर रिपोर्ट आने व उसे सीएमओ की वेबसाइट पर अपलोड करने में अस्पताल ने कई दिन लगा दिए। इस बीच मरीज का आक्सीजन स्तर 70 के भी नीचे जाने रहा। तब परिवारजन उन्हें भर्ती के लिए उक्त अस्पताल से लेकर अन्य जगह भटकते रहे। मगर रिपोर्ट नहीं आने से नॉन कोविड में कोविड के लक्षणों के चलते किसी भी सरकारी व निजी अस्पताल में भर्ती नहीं हो सके। आखिरकार गुरुवार को जब उनकी रिपोर्ट आई तो तब तक इतनी देरी हो चुकी थी कि भर्ती होने के बावजूद कुछ ही घंटों में मरीज की मौत हो गई। इससे सिस्टम पर सवाल उठना लाजमी है।

अलीगंज निवासी 60 सुशील श्रीवास्तव को करीब एक हफ्ते पहले सांस लेने में तकलीफ व खांसी बुखार की दिक्कत हुई थी। उन्होंने 1500 रुपये देकर निजी जांच कराई। बावजूद उनकी रिपोर्ट पांच दिन गुजर जाने के बाद भी नहीं आई। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। कोई भी अस्पताल ने उन्हें भर्ती करने को तैयार नहीं हुआ। आखिरकार वह फिर स्वामी विवेकानंद पॉलीक्लिनिक में गए। वहां भी कोरोना रिपोर्ट नहीं की बात कह भर्ती नहीं किया। इससे दो दिनों तक ऑक्सीजन सिलिंडर लगाकर कार में ही पड़े रहे। गुरुवार को रिपोर्ट आने के बाद भर्ती तो हुए। मगर सांसें उखड़ गई। राजधानी में सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों का सिस्टम खराब हो चुका है। लोड की वजह से मरीजों को भर्ती नहीं मिल रही है। ऐसे में अधिकतर मरीज अस्पतालों के बाहर की दम तोड़ रहे हैं। 

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