रायबरेली [रसिक द्विवेदी]। कोई बड़ा करिश्मा न हुआ तो एमएलसी परिवार भाजपा में शामिल हो जाएगा। परिवार की मंशा है कि नए दल में शामिल होने के लिए जिले में ही बड़ा आयोजन किया जाए। इसमें प्रधान-बीडीसी समेत बूथ स्तर के समर्थकों को बुलाया जाएगा।

इस इंतजाम से कांग्रेस नेतृत्व को संदेश देने का प्रयास भी होगा कि देखिए नुकसान कितना हो रहा है। दरअसल पंचवटी के पांच भाइयों ने कांग्रेस से अपनी लाइन अलग कर ली है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो उनका अगला ठिकाना भाजपा होगी। पार्टी नेतृत्व से वार्ता लगभग फाइनल हो चुकी है। अब उसे अमलीजामा पहनाया जाना है।

एमएलसी दिनेश सिंह करीब 15-16 वर्षों से कांग्रेस का हाथ मजबूती से पकड़े थे। इधर कमजोर होती कांग्रेस से उनका मोहभंग हुआ। फिर उन्होंने नया ठौर तलाशना शुरू किया। बताया जाता है कि उन्होंने दिल्ली और लखनऊ में भाजपा के बड़े नेताओं से मुलाकात भी की। फिर परिवार संग कांग्रेस छोडऩे की मंशा अपने भाई अवधेश सिंह मार्फत सरेआम करा दी। माना जा रहा है कि यह सब एक रणनीति के तहत किया गया है। इसकी नींव जिला पंचायत के अविश्वास प्रस्ताव के दौरान ही पड़ गई थी। दरअसल पंचवटी परिवार को सांसद सोनिया गांधी के कुछ नजदीकी लोगों से सीधे शिकायत है। इनका आरोप है कि कुछ बड़े चेहरे रायबरेली की जमीनी हकीकत को पार्टी आलाकमान तक पहुंचने ही नहीं देते हैं।

सीट यहां की कोआर्डिनेटर बिहार का

दरअसल कांग्रेस से नाराजगी कई छोटी-बड़ी बातों को लेकर बढ़ती गई। हरचंदपुर विधानसभा के कॉर्डिनेटर बिहार के कांग्रेस नेता को बनाया गया। इसको लेकर स्थानीय स्तर पर आपत्ति जताई गई। हरचंदपुर विधायक राकेश प्रताप सिंह साफ कहते हैं कि जिस ब्लॉक में अल्पसंख्यक निवास नहीं करते, वहां का ब्लॉक अध्यक्ष अल्पसंख्यक समाज से है। यह सब मनमानी कांग्रेस के बड़े नेता करते रहे। जबकि यहां जनप्रतिनिधि के राय से ऐसे निर्णय किए जाने चाहिए।

दौरे के बाद थामेंगे नया झंडा

एमएलसी दिनेश सिंह के बारे में बताया जा रहा है कि जिले के 18 ब्लॉकों में अपने कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। रायशुमारी कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि एक-दो दिन में यह कार्यक्रम पूर्ण हो जाएगा। उसके बाद नए दल का झंडा संभाल लिया जाएगा।

पाला बदलने में कानूनी बाधा आएगी

सांसद प्रतिनिधि केएल शर्मा  ने कहा कि मैं दो दिन से जिले में हूं। मुझे मीडिया से ही जानकारी मिली है कि पंचवटी परिवार कुछ नया सोच रहा है। वे हमारे टच में नहीं हैं। मैं कांग्रेस का कोई निर्णायक व्यक्ति नहीं हूं। आलाकमान से उनका भी परिचय है। हो सकता है कि किसी और माध्यम से अपनी बात नेतृत्व तक पहुंचा रहे हों। दल बदल कानून के अंतर्गत पाला बदलने में भी बाधा आएगी। ऐसा मैं समझ रहा हूं। हालांकि मैं कोई एक्सपर्ट नहीं हूं। फिर भी वे क्या सोच रहे हैं, वे जानें। मुझसे इस संबंध में न कोई वार्ता हुई, न ही मुझे कोई खास जानकारी है। 

Posted By: Nawal Mishra