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अब मध्य प्रदेश के जमीन विवाद को लेकर ओपी राजभर ने अखिलेश के खिलाफ खोला मोर्चा, बोले- तिलमिलाहट बता रही है भारी निवेश हुआ है

Published: Wed, 24 Jun 2026 12:31 PM (IST)

ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर एक बार हमलावर रुख अख्तियार किया है। इस बार राजभर ने सपा प्रमुख की ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने इन दिनों अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, समाजवादी पार्टी में टूट की अटकलों को हवा देने के बाद अब उन्होंने सपा प्रमुख के उस बयान की लामबंदी शुरू कर दी है, जिसमें उन्होंने जमीन विवाद को लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का बचाव किया था।

राजभर ने अखिलेश की इस टिप्पणी को उनकी राजनीतिक घबराहट करार देते हुए सवाल किया है कि मोहन यादव के संबंध में इतना हल्ला क्यों कर रहे हैं? इतना शोर करके सपा सुप्रीमों क्या छुपाना चाहते हैं? सवालों की कड़ी में उन्होंने पूछा कि ऐसा क्यों चाहते हैं कि दुनिया वही देखे जो आप दिखाएं?

ओम प्रकाश राजभर ने एक्स (पहले ट्विटर) पर अपने चिरपरिचत अंदाज में एक लंबा पोस्ट किया, जहां उन्होंने अखिलेश के परिवार को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने लिखा अब बताता हूं, आपकी पीड़ा क्या है? आप क्यों घबरा गए! कैसे आपके निवेश पर चोट पहुंच गई और क्यों आप बौखला गए?

अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि अखिलेश जी! एमपी कैडर के आईएएस भरत यादव जो राज्य सड़क विकास निगम के चेयरमैन हैं, उनसे आपने अपना रिश्ता छिपा लिया। अखिलेश जी भरत यादव आपके "कुबेर" चंद्रपाल यादव के दामाद हैं। चंद्रपाल यादव सपा के कद्दावर नेता और पार्टी कोषाध्यक्ष रहे हैं। उम्मीद है कि आपको याद आ गया होगा। 

ओपी राजभर का पूरा पोस्ट

अखिलेश यादव जी, माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी के संबंध में इतना हल्ला क्यों कर रहे हो? इतना शोर करके छुपाना क्या चाहते हो आप? ऐसा क्यों चाहते हैं कि दुनिया वही देखे जो आप दिखाएं?

अब बताता हूं, आपकी पीड़ा क्या है? आप क्यों घबरा गए! कैसे आपके निवेश पर चोट पहुंच गई और क्यों आप बौखला गए?

तो पढ़िए!

अखिलेश जी! एमपी कैडर के आईएएस भरत यादव जो राज्य सड़क विकास निगम के चेयरमैन हैं, उनसे आपने अपना रिश्ता छिपा लिया। अखिलेश जी भरत यादव आपके "कुबेर" चंद्रपाल यादव के दामाद हैं। चंद्रपाल यादव सपा के कद्दावर नेता और पार्टी कोषाध्यक्ष रहे हैं। उम्मीद है कि आपको याद आ गया होगा।

अखिलेश यादव जी, माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी के नाम पर हुए एक फर्जी खुलासे से आप डर गए? मध्य प्रदेश में हाईवे का रास्ता कहां से जाएगा- यह भरत यादव तय करते हैं या उन्हें इस बात की जानकारी होती है। जो आपके हैं, अपने हैं, खास हैं।

इस मामले में अखिलेश जी आपकी तिलमिलाहट बता रही है कि भरत यादव ने आपसे और अपने लोगों से वहां की जमीनों में भारी निवेश करवाया है। और जमीन 'खाने' के मामले में सैफई परिवार बहुत अनुभवी है। इसे पूरा उत्तर प्रदेश जानता है।

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे में सैफई परिवार ने यही किया था। फिरोजाबाद से इटावा तक जमीनें खरीदी गईं और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के रूट को मनमाने तरीके से मोड़ा गया।

निजी फायदे के लिए सैफई तक अनावश्यक रूप से रूट का मार्ग घुमाकर एक्सप्रेसवे की दूरी 30 किमी और ज्यादा बढ़ा दी गई। औने-पौने दाम में जमीनों को खरीदकर भारी भरकम मुआवजा वसूला गया।

सपाई लोडरों!
गोमती रिवर फ्रंट की रिपोर्ट जारी करने के बाद अखिलेश को डर बैठ गया है कि कहीं मध्य प्रदेश एक्सप्रेसवे रिपोर्ट जारी न हो जाए, जिससे उनका निवेश डूब जाए।

जांच एजेंसियों को पता लगाना चाहिए कि मध्य प्रदेश में उत्तर प्रदेश के कौन-कौन से सफेदपोश निवेशक शामिल हैं।

 

क्या बोले थे अखिलेश

बताते चलें कि मंगलवार को अखिलेश यादव ने मोहन यादव के जमीन विवाद पर टिप्पणी करते हुए उनका समर्थन किया था। उन्होंने मध्य प्रदेश के सीएम के खिलाफ उठे इस पूरे विवाद को बीजेपी की साजिश करार देते हुए कहा था कि मोहन यादव को बदनाम करने की नियत से इस मामले को उठाया गया है।

उन्होंने कहा था कि बीजेपी रास्ता ढूंढ रही है कि कैसे तीन राज्यों के मुख्यमंत्री बदले। उन्होंने दावा किया था कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के साथ-साथ पार्टी यूपी के मुख्यमंत्री भी बदलना चाहती है। इसके बाद से मामले को लेकर बीजेपी और सपा के बीच बयानबाजी का दौर तेज हो चला है।

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