लखनऊ [संदीप पांडेय]। हृदय रोगियों को हर रोज दवा खाने के झंझट से छुटकारा मिलेगा। साल में महज दो बार इंजेक्शन लगाने से शरीर से बैड कोलेस्ट्राल का सफाया हो जाएगा। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की अनुमति मिलते ही इंजेक्शन बाजार में उपलब्ध होंगे। डॉक्टरों का दावा है कि राइबो न्यूक्लिक एसिड (आरएनए) बेस्ड थेरेपी हृदय रोगियों के लिए गेम चेंजर साबित होगी। 

सफल रहा प्रयोग 

सितंबर-19 के पहले सप्ताह में नई दवा के तीसरे ट्रायल की पेरिस में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। यूरेपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी के ओरिएन प्रजेंटेशन में मरीजों में 54 फीसद तक लिपिड कम पाया गया। इंजेक्शन के रूप में आई इस नई दवा का नाम इंक्लीसिरन है। 

25 फीसद कम होगा हार्ट अटैक का खतरा

शरीर में दो तरह के कोलेस्ट्राल होते हैं। एक हाई डेंसिटी लाइपो प्रोटीन (एचडीएल) होता है। इसे गुड कोलेस्ट्राल कहते हैं। दूसरा हाई डेंसिटी लाइपो प्रोटीन (एलडीएल) यानी बैड कोलेस्ट्राल धमनियां ब्लॉक करके दिल के लिए खतरनाक साबित होता है। शरीर के बैड कोलेस्ट्राल (एलडीएल) के खात्मे के लिए रिसेप्टर होते हैं। आरएनए बेस्ड इंजेक्शन थेरेपी से इन्हें सक्रिय करने के साथ इनकी मात्रा भी बढ़ाएगा।  डॉ. गौरव चौधरी ने बताया कि यह थेरेपी एंजाइना, हार्ट अटैक की संभावना, एंजियोप्लास्टी व हाईरिस्क ग्रुप के मरीजों में काफी कारगर साबित होगी। यह लिपिड कंट्रोल के साथ 25 फीसद तक हार्ट अटैक का खतरा भी टालेगी। 

बेड कोलेस्ट्राल का सफाया होगा 

चीफ एडिटर केजीएमयू  डॉ. गौरव चौधरी ने बताया कि आरएनए बेस्ड यह थेरेपी लिपिड (कोलेस्ट्राल) नियंत्रण के लिए ताउम्र रोज खाई जाने वाली टेबलेट से छुटकारा दिलाएगी। साल में सिर्फ दो इंजेक्शन से मरीज में नुकसानदायक कोलेस्ट्राल का सफाया हो सकेगा।

लिपिड सामान्य व्यक्ति  रोगी

  • एलडीएल 100 से कम  70 से कम
  • एचडीएल  35 से 40   40 से ऊपर

Posted By: Anurag Gupta

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