लखनऊ, जेएनएन। हर उम्र पर तनाव हावी है। बच्चे समस्या से उबरने में विफल हो रहे हैं। लिहाजा, वह आत्महत्या का रास्ता चुन रहे हैं। शहर में लगातार हुईं घटनाओं को लेकर दैनिक जागरण ने लिखना जरूरी है...अभियान चलाया। 

वहीं, इस अभियान का सरकार ने भी संज्ञान लेते हुए फिक्र जताई। स्कूली स्तर पर स्ट्रेस मैनेजमेंट फॉर्मूला अपनाने का फैसला किया गया। ऐसे में राज्य नोडल ऑफीसर मेंटल हेल्थ डॉ. सुनील पांडेय ने नई पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य के लिए खाका तैयार किया है। जिसके तहत बुधवार यानी आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आत्महत्या को रोकने के लिए मिलकर साथ काम करें की थीम को लेकर सीएमओ कार्यालय में नोडल शिक्षकों के लिए  उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसमें 80 स्कूलों के शिक्षकों को चरणवार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। राजधानी के हर सरकारी व निजी स्कूल के एक शिक्षक को बतौर मेंटल हेल्थ नोडल ऑफीसर नामित कर बुलाया गया। 

शिक्षकों को दी जा रही यह ट्रेनिंग

  • मेंटल हेल्थ फस्र्ट एड
  • लाइफ स्किल मैनेजमेंट ऑफ चिल्ड्रेन
  • स्ट्रेस मैनेजमेंट

 

ऐसे करेंगे स्ट्रेस से लडऩे में मदद

यह क्लास के गुमशुम, चिड़चिड़ापन व तनाव में घिरे बच्चों पर नजर रखेंगे। उनकी काउंसिलिंग की जाएगी। अभिभावकों से संवाद होगा। साथ ही पढ़ाई में आ रही अड़चनों को लेकर क्लास टीचर-प्रिंसिपल से समाधान का विमर्श करेंगे। साथ ही 10 अक्टूबर को विश्वमानसिक स्वास्थ्य दिवस पर एक हजार बच्चों को स्टे्रस मैनेजमेंट की सीख दी जाएगी।

तनाव बना रहा नशा का शिकार

डॉ. सुनील पांडेय के मुताबिक, बच्चे तनाव में आकर बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। पांच से सात फीसद बच्चे स्ट्रेस, डिप्रेशन एंजाइटी से पीडि़त हैं। ऐसे में दो फीसद 13 से 19 वर्ष के युवा नशा के लती हो गए।

 

Posted By: Divyansh Rastogi

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