लखनऊ, जेएनएन। रीढ़ की हड्डी में कुशन का काम करने वाली डिस्क कोलेप्स होने पर हाथ-पैर में कमजोरी और दर्द की परेशानी होती है। कई बार इसके कारण रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो जाता है। मिनिमल इनवेसिव सर्जरी से तीन से चार दिन में हमेशा के लिए इन तमाम परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है। इस तकनीक में जितना डिस्क अपने स्थान से बाहर निकल कर नर्व को दबा रहा है उसे निकाला जाता है। तीन से चार दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। 

यह जानकारी संजय गांधी पीजीआइ में आयोजित मिनिमल इनवेसिव सर्जरी पर आयोजित वर्कशॉप में गवर्नमेंट सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल जबलपुर डॉ. वाइआर यादव, कोरिया के डॉ. कैग टीकलीन, गंगाराम दिल्ली के डॉ. सत्यनाम छाबडा, पीजीआइ के डॉ. अवधेश जायसवाल और डॉ. जय सरदारा ने दी। 

बताया कि स्पाइन में डिस्क कोलेप्स, ट्यूमर सहित कई परेशानियों में अब ओपन सर्जरी की जरूरत खत्म हो गई है। न्यूरो सर्जरी में आने वाले कुल मामलों में से 50 फीसद मरीजों में स्पाइन की परेशानी होती है। इस सर्जरी में एक इंच से भी कम चीरा लगाकर माइक्रोस्कोप से देखते हुए वहां पहुंच कर डिस्क या हड्डी को निकाल कर नर्व पर प्रेशर कम किया जाता है। ट्यूमर होने पर ट्यूब से ट्यूमर को निकाल दिया जाता है। इसमें कम रक्तस्राव के साथ अस्पताल में रुकने का खर्च होने के कारण इलाज का खर्च कम हो जाता है। वर्कशॉप में चार मरीज जिनके रीढ़ की हड्डी में स्लिप डिस्क और गर्दन के पास डिस्क में परेशानी वाले एक मरीज में सर्जरी कर नए न्यूरो सर्जन को दिखाया गया।  

विशेषज्ञों ने बताया कि रीढ़ ही हड्डी में स्लिप डिस्क होने पर 90 फीसद मरीजों में दर्द से राहत दवा और फिजियोथिरेपी से मिल जाती है। 10 फीसद में सर्जरी की जरूरत पड़ती है।  

हाथ-पैर सुन्न और कमर में तेज दर्द तो न करें इंतजार 
विशेषज्ञों ने बताया कि यदि हाथ-पैर सुन्न, लकवा, कमर में तेज दर्द की परेशानी है तो इन मामलों में तीन महीने इंतजार करने से बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है। इसमें जल्द से जल्द सर्जरी कर बढ़ी डिस्क को निकाल कर नर्व पर प्रेशर कम करना चाहिए।  

रीढ़ बचाने के लिए करें ये उपाय

  • शरीर का वजन करें कम।
  • धूमपान से बचें।
  • भारी सामान न उठाएं।
  • गड्ढे में बाइक को रखें धीमा।
  • तैराकी को करें दिनचर्या में शामिल। 

Posted By: Anurag Gupta

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