लखनऊ [संदीप पांडेय]। लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में आर्गन ट्रांसप्लांट की जांच शुरू होगी। इसके लिए जल्द ही ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में मशीन लगेगी। ऐसे में मरीजों को पीजीआइ तक दौड़भाग करने से छुटकारा मिलेगा।

दरअसल, आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजेन (एचएलए) टेस्ट आवश्यक होता है। यह जांच मरीज और अंगदाता दोनों में अनिवार्य होती है। एचएलए टेस्ट के जरिए मरीज-डोनर में रिसेप्टर लेवल पर स्टडी की जाती है। दोनों की जांचों में मिलान होने पर ही अंग प्रत्यारोपण की हरी झंडी दी जाती है। बगैर, एचएलए जांच लिवर, किडनी व अन्य अंगों का प्रत्यारोपण मुमकिन नहीं है।

किडनी ट्रांसप्लांट को मिलेगी गति

  ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुब्रत चंद्रा के मुताबिक मशीन खरीद का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है। दो माह में जांच शुरू होने की उम्मीद है। इससे संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट को गति मिलेगी। अभी तक 60 के करीब किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। सभी डोनर व मरीजों को जांच के लिए पीजीआइ भेजा गया था।

केजीएमयू के लिवर ट्रांसप्लांट में मददगार

एचएलए जांच लोहिया संस्थान में शुरू होने से केजीएमयू को भी मदद मिलेगी। यहां के लिवर ट्रांसप्लांट के मरीजों को एचएलए जांच के लिए पीजीआइ तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। केजीएमयू में अब तक करीब आठ लिवर ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। 

पीजीआइ में घटेगी वेटिंग

दरअसल, पीजीआइ में खुद के मरीजों का भार काफी है। यहां किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों की लंबी लाइनें हैं। ऐसे में लोहिया संस्थान में एचएलए जांच शुरू होने से पीजीआइ में वेटिंग घटेगी। यहां केजीएमयू व लोहिया संस्थान के मरीजों व डोनर का बोझ कम होगा।

Posted By: Divyansh Rastogi

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