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लखनऊ, जेएनएन। डॉक्टरों, डिस्ट्रीब्यूटर और फार्मा कंपनियों की साठगांठ पर एफएसडीए का हंटर चलेगा। अब डॉक्टर ऐसी ही दवा लिख सकेंगे, जो सर्वसुलभ हो। साथ ही संबंधित दवा को विशेष फार्मेसी पर ही आपूर्ति करना भी कानूनन जुर्म होगा।

प्रदेश में जहां सवा लाख के करीब मेडिकल स्टोर हैं। वहीं हजारों की संख्या में प्राइवेट अस्पताल व क्लीनिक है। शिकायत मिली है प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की दवा सिर्फ उन्हीं की फार्मेसी में मिलती है। ऐसे में मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा कई डॉक्टरों के आसपास खुले मेडिकल स्टोरों पर ही दवा मिलती है। इसका प्रमुख कारण, फार्मा कंपनियों, डिस्ट्रीब्यूटर, मेडिकल स्टोर व डॉक्टर की साठगांठ होना है। लिहाजा खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने इस मोनोपॉली पर हंटर चलाने का फैसला किया।

चि‍ह्न्ति किए जाएंगे डॉक्टर और फार्मेसी

ड्रग कंट्रोलर यूपी एके जैन ने 12 सितंबर को आदेश जारी किया है। इसमें प्रदेश के सभी ड्रग इंस्पेक्टर को निजी अस्पतालों, क्लीनिकों में संचालित फार्मेसी का निरीक्षण करने को कहा है। साथ ही डॉक्टरों द्वारा लिखी जा रही दवा कौन-कौन सी हैं। यह बाजार में मिलती हैं कि नहीं, इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसमें नामी-गिरामी डॉक्टर के आस-पास खुले मेडिकल स्टोरों का भी ब्योरा जुटाया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक करीब 80 से 90 फीसद निजी अस्पताल खुद की फार्मेसी चला रहे हैं। इनकी दवाएं अन्य जगह नहीं मिलती हैं।

ड्रग एक्ट में दर्ज होगा केस

ड्रग कंट्रोलर एके जैन के मुताबिक यदि कोई डॉक्टर दवा लिखता है, तो वह अन्य मेडिकल स्टोर पर भी उपलब्ध होनी चाहिए। यदि कोई कंपनी, डिस्ट्रीब्यूटर किसी खास फार्मेसी पर ही दवा उपलब्ध कराता है।

ये भी जानें

  • देशभर में आठ लाख से अधिक दवा दुकानें
  • यूपी में एक लाख 25 हजार के करीब दवा दुकानें हैं।
  • लखनऊ में 1800 थोक व 2400 के करीब खुदरा दवा की दुकानें हैं
  • देश में दवा का कारोबार 86 हजार करोड़ रुपये सालाना है
  • यूपी में एक दिन का दवा कारोबार 90 करोड़ व लखनऊ में 35 करोड़ रुपये के लगभग है।

Posted By: Divyansh Rastogi

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