लखनऊ [संदीप पांडेय]। आयुर्वेद कॉलेजों-अस्पतालों में दवा का संकट खत्म होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि प्राचार्यों और क्षेत्रीय अधिकारियों के क्रय का अधिकार बढ़ेगा। वह अब तीन गुना अधिक किस्म की दवा खरीद सकेंगे। ऐसे में मरीजों को राहत मिलेगी।

राज्य में आठ आयुर्वेदिक कॉलेज हैं। वहीं 2,104 डिस्पेंसरी और अस्पताल हैं। कॉलेजों में दवा खरीद का जिम्मा प्राचार्यों का होता है। वहीं, डिस्पेंसरी, अस्पताल में दवा क्षेत्रीय व जिला आयुर्वेदिक अधिकारी मुहैया कराते हैं। इनके पास 40 किस्म की दवा ही बाजार से क्रय करने का अधिकार है। अब वह 120 तरह की दवाएं खरीद सकेंगे। इसके लिए दवा का बजट भी बढ़ेगा। राज्य में आयुर्वेद कॉलेज लखनऊ, बांदा, झांसी, प्रयागराज, बनारस, पीलीभीत, मुजफ्फरनगर और बरेली में संचालित हैं।

फरवरी अंत तक भेजेंगे प्रस्ताव

आयुर्वेदिक निदेशक डॉ. एसएन सिंह के मुताबिक अस्पतालों व कॉलेजों में राजकीय औषधि निर्माणशाला व बाजार से क्रय कर दवा मुहैया कराई जाती है। निर्माणशाला में 35 से 40 तरह की दवाओं का ही उत्पादन हो पा रहा है। वहीं, बाजार से भी सिर्फ 40 किस्म की दवा ही खरीदने का अधिकार है। ऐसे में कॉलेज व अस्पताल में आने वाले मरीजों के समुचित उपचार में बाधा उत्पन्न होती है। फरवरी तक सरकार को 120 तरह की दवा खरीद का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। सभी प्रचार्य व क्षेत्रीय अधिकारियों से दवाओं की सूची मांगी गई है।

इन दवाओं की हो रही आपूर्ति 

सुदर्शन चूर्ण, निंबादि चूर्ण, हरीतकी चूर्ण, आमलकी चूर्ण, पिप्पली चूर्ण, बिल्वादि चूर्ण, बालचर्तुभद्रचूर्ण, अशोका रिष्ट, पुष्यानुग चूर्ण, संजीवनी वटी, योगराज गुगुग्गुल, रज: प्रवर्तनीवटी, अरोग्य वर्धनी वटी, गोदंती भस्म, शंख भस्म, त्रिभुवनकीर्ति रस, कफकेतु रस, अर्जुना रिष्ट, पंचगुण तेल, रास्नादि क्वाथ, कुटजा रिष्ट, जटामांस्यादि क्वाथ, यवक्षार, श्वेत पर्पटी, शुद्ध स्वर्ण गैरिक, शुद्ध गंधक, शुद्ध कपील, शुद्ध टंकण, शुद्ध नस्सार, शुद्ध स्फटिका, तालिसादि चूर्ण, दशमूल क्वाथ आदि हैं।

Posted By: Anurag Gupta

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