लखनऊ (जेएनएन)। खनन के भ्रष्टाचार को लेकर पिछली सरकार चौतरफा घिरी थी। भाजपा सरकार ने दीर्घकालीन नई खनन नीति को लागू करते हुए सैटेलाइट से अवैध खनन की निगरानी कराने का फैसला किया है।लोकभवन में कैबिनेट ने नई खनन नीति लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। खनन के मुकदमों के निपटारे के लिए राज्य स्तर पर विशेष न्यायालय की स्थापना का भी निर्णय हुआ है। इसके लिए उच्च न्यायालय से परामर्श लिया जाएगा।


नई नीति के तहत अब हाईटेक टेक्नालाजी के जरिए खनन का भ्रष्टाचार खत्म करने और पारदर्शिता लाने की पहल की गई है। हर तरह के खनन के पट्टे की मियाद बढ़ाई गई है। खनन से मिलने वाली रायल्टी के लक्ष्य में भी इजाफा किया है। 1.85 प्रतिशत की जगह अब तीन फीसद रायल्टी ली जाएगी। टेक्नालाजी पर आने वाले खर्च की पूति के लिए रायल्टी पर एक फीसद सेस लिया जाएगा। सरकार ने तय किया है कि हर तरह के खनन के लिए ई-टेंडरिंग, ई-बिडिंग और ई-आक्शन होगा।

अवैध खनन रोकने के लिए राज्य सरकार सेटेलाइट मैपिंग, जीपीएस, सर्विलांस सिस्टम और सीसीटीवी कैमरों का प्रयोग करेगी। खनन के परिवहन वाहनों की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से होगी। प्रमुख सचिव खनन राज प्रताप सिंह ने बताया कि बालू और मौरंग का खनन करने पर पांच वर्ष का पट्टा दिया जाएगा। यह वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप होगा। पत्थर खनन आवेदन के बजाय ई-टेंडरिंग के जरिए होगा। पत्थर खनन के पट्टे की अवधि पहले दस वर्ष होती थी जिसे बढ़ाकर 20 वर्ष कर दिया गया है। इसमें भी ई-आक्शन का विकल्प रखा गया है। इसी तरह ग्रेनाइट, सिलिका, सैंड इत्यादि खनिजों के खनन के पट्टे की अवधि बढ़ाकर 30 वर्ष कर दी गई है।


सरकार ने किसानों के लिए दस ट्राली मिट्टी का खनन करने के पूर्व निर्धारित नियम को बरकरार रखा है। नई नीति के तहत सरकारी विभाग रायल्टी अदा करकेमिट्टी की व्यवस्था खुद कर सकेंगे। दरअसल ठेकेदार विभागों से रायल्टी तो वसूल लेते थे लेकिन, उसे सरकारी खजाने में जमा नहीं करते थे। राज्य सरकार ने यह भी साफ किया है कि पुराने पट्टाधारकों का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। हालांकि उन्हें ई-ऑक्शन में सबसे ज्यादा बोली लगाने पर कुछ सहूलियत दी जा सकती है।

साथ ही एप लांच करने से ऑनलाइन रायल्टी जमा की जा सकेगी और बार कोड जेनरेटेड एमएम-11 परमिट घर बैठे मिल सकेगा। अपर मुख्य सचिव राज प्रताप सिंह ने बताया कि इसके लिए मोबाइल ऐप तैयार कर लिया गया है। अवैध खनन करने वाले दबंगों की सूची भी बननी शुरू हो गई है। डिफाल्टर ठेकेदारों का नाम काली सूची में डाले जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह दीर्घकालीन खनन नीति है। इसके पहले लघु कालीन नीति के तहत सूबे के 61 जिलों में ई-टेंडरिंग के जरिए खनन की प्रक्रिया शुरू है।
 

Posted By: Ashish Mishra

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