लखनऊ (जेएनएन )।  लखनऊ विश्वविद्यालय (लविवि) में दो साल बाद शुरू हो रही पीएचडी एमफिल दाखिला प्रक्रिया से कई बड़े प्रोफेसर बाहर हो सकते हैं। नए प्रावधानों के तहत पांच अंतराष्ट्रीय शोध पत्र के प्रकाशन पर रिसर्च गाइड बन सकते है। इसके अनुसार लविवि के अधिकांश प्रोफेसरों पीएचडी प्रक्रिया के इस नियम से अभी कोसो दूर हैं। जिसके चलते पीएचडी प्रक्रिया से उनका बाहर होना तय है। विवि के जानकारों की मानें तो विवि के कई वरिष्ठ प्रोफेसर ऐसे हैं जिनके अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रों का प्रकाशन नहीं है, इस कारण उन प्रोफेसरों को रिसर्च गाइड बनने का मौका नहीं मिल सकेगा। यूजीसी के नए प्रावधान के तहत ही  इस बार वही प्रोफेसर पीएचडी करा सकते हैं, जिन्होंने खुद ही पीएचडी की हो। 

 सीटों की संख्या में होगी कटौती

यूजीसी के नए नियमों का अनुपालन करने के लिए इस बार सीटों की संख्या में कटौती की जा सकती है। साल 2015 में पीएचडी दाखिले में विवि ने 500 से अधिक सीटों पर प्रवेश लिया। वहीं इस बार सीटों की संख्या में तीन सौ के आसपास सिमटने के आसार हैं। यूजीसी के नियम के अनुसार एक प्रोफेसर आठ अभ्यर्थी का ही रिसर्च गाइड बन सकता है। ऐसे में रिसर्च गाइड बनने के नए प्रावधान पर फिट न बैठने के चलते सीटों का कम होना भी वाजिब है। इस बाबत विवि के प्रवक्ता प्रो एनके पाण्डेय से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा।

Posted By: Anurag Gupta