लखनऊ : आर्थिक तंगी और पिता की असमय मौत पर भी नीलू ने नहीं मानी हार, घरेलू सहायिका की बेटी ने नीट में फहराया परचम
आर्थिक तंगी और पिता की असमय मृत्यु जैसी चुनौतियों के बावजूद नीलू ने नीट परीक्षा पास कर डॉक्टर बनने का ...और पढ़ें

HighLights
नीलू ने आर्थिक तंगी, पिता की मृत्यु के बाद नीट पास की।
घरेलू सहायिका की बेटी को नीट में 54,524 रैंक मिली।
हृदय रोग विशेषज्ञ बनकर गरीबों की सेवा करना चाहती है नीलू।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। आर्थिक तंगी और पिता की असमय मृत्यु जैसी कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए घरेलू सहायिका की बेटी नीलू ने नीट पास करके अपने डाक्टर बनने के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
नीलू को आरक्षित वर्ग में आल इंडिया 54,524 रैंक मिली है। अब वह मेडिकल कालेजों में दाखिले की तैयारी कर रही है। इस रैंक के आधार उन्हें सरकारी मेडिकल कालेज मिलने की पूरी उम्मीद है। उसका सपना हृदय रोग विशेषज्ञ बनकर गरीब परिवारों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है।
घरों में काम करके चलाती हैं खर्च
गोमती नगर के डिगडिगा गांव की रहने वाली नीलू अपनी मां राजकुमारी और छोटी बहन के साथ रहती हैं। मां एक अस्पताल में सहायिका के साथ-साथ घरों में काम करके खर्च चलाती हैं। नीलू ने बताया, जब वह कक्षा आठ में थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया, क्योंकि हम उनके इलाज का खर्च नहीं उठा सके थे।
उस दिन से मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। तभी मैंने तय कर लिया कि डाक्टर बनूंगी, ताकि किसी परिवार को गरीबी की वजह से इलाज के अभाव में अपना प्रियजन न खोना पड़े।
प्रेरणा स्कूल बना मददगार
स्टडी हाल स्कूल की प्रधानाचार्य मीनाक्षी बहादुर ने बताया कि नीलू की पढ़ाई की शुरुआत स्टडी हाल एजुकेशनल फाउंडेशन की ओर से संचालित प्रेरणा गर्ल्स स्कूल से हुई। वह पढ़ाई में तेज और मेहनती छात्रा रही। अच्छी पढ़ाई के दम पर उन्हें कक्षा 11 में स्टडी हाल स्कूल से छात्रवृत्ति मिली। सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के साथ उन्होंने नीट की तैयारी भी की। 12वीं में वह 94 प्रतिशत अंकों के साथ पाई हुईं।
नीलू को प्रतिष्ठित वहानी स्कालरशिप भी मिली है, जिससे वह मेडिकल की पढ़ाई कर हृदय रोग विशेषज्ञ बनने का अपना सपना पूरा कर सकेंगी। स्टडी हाल एजुकेशनल फाउंडेशन की संस्थापक डा. उर्वशी साहनी ने कहा कि नीलू की कहानी इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा हर जगह होती है, लेकिन अवसर हर किसी को नहीं मिलते। जब लड़कियों को अच्छी शिक्षा, प्रोत्साहन मिलता है तो वे जिंदगी भी बदल देती हैं।
