Navratri Special: उत्तर प्रदेश की इन 5 शक्तिपीठों का है विशेष महत्व, देश के कोने-कोने से पहुंचते हैं भक्त
उत्तर प्रदेश में शारदीय नवरात्र के दौरान पांच सिद्ध शक्तिपीठों का विशेष महत्व बताया गया है, जहां भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं

HighLights
उत्तर प्रदेश में हैं 5 प्रमुख सिद्ध शक्तिपीठ।
नवरात्र में इन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़।
माता सती के अंगों से जुड़े हैं ये पवित्र स्थल।
सचिन शर्मा, लखनऊ। देशभर में शारदीय नवरात्र की धूम है। हर शहर में लोग अलग-अलग परंपराओं के साथ इन पवित्र दिनों में मां की आराधना कर रहे है। यूं तो उत्तर प्रदेश में कई पवित्र और सिद्ध मंदिर हैं। लेकिन आज हम आपको उत्तर प्रदेश में मौजूद 5 शक्तिपीठ के बारे में बताने वाले हैं, जहां श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर माता की भक्ति करने जाते हैं।
विशालाक्षी शक्तिपीठ
वाराणसी शहर अपने गंगा घाटों और काशी विश्वनाथ धाम के कारण ही नहीं जाना जाता बल्कि यहां प्रसिद्ध शक्तिपीठ भी मौजूद है। विशालाक्षी शक्तिपीठ मणिकर्णिका घाट के पास स्थित है। माना जाता है कि यहां माता सती की मोतियों से जड़ी बालियां गिरी थीं। इसलिए माता यहां विशालाक्षी और मणिकर्णी रूप में प्रसिद्ध हुईं।

रामगिरि शक्तिपीठ
उत्तर प्रदेश के पवित्र शहरों में से एक चित्रकूट में रामगिरि शक्तिपीठ मौजूद है। मान्यता है कि यहां माता सती का वक्ष गिरा था। यहां के स्थानीय लोग माता को मां शिवानी भी कहते हैं। नवरात्र पर इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

पंच सागर शक्तिपीठ
वाराणसी में पंच सागर शक्तिपीठ भी स्थित है। मान्यता है कि यहां माता के निचले दांत गिरे थे, लेकिन इस शक्तिपीठ का निश्चित स्थान के बारे में अधिक जानकारी नहीं है।। यहां माता हाथों में चक्र, शंख और तलवार धारण किए हुए हैं।

पाटेश्वरी देवी शक्तिपीठ
बलरामपुर में मौजूद पाटेश्वरी देवी शक्तिपीठ की बहुत मान्यता है। लोग यहां दूर-दूर से माता के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्र के अवसर पर यहां इतनी भीड़ होती है कि पैर रखने तक की जगह नहीं होती। माना जाता है कि यहां माता का बांया कंधा (स्कन्ध) गिरा था। कुछ भक्त मानते हैं कि माता सती का पाटन वस्त्र भी इसी स्थान पर गिरा था। इस स्थान पर एक शाश्वत ज्वाला भी जल रही है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह त्रेता युग से ही लगातार जली आ रही है।

प्रयाग शक्तिपीठ
संगम नगरी प्रयागराज देश के सबसे पवित्र शहरों में से एक हैं, यहां संगम तट पर मां गंगा में डुबकी लगाने लोग देश के कोने-कोने से आते हैं। लेकिन इसी शहर में तीन मंदिरों को शक्तिपीठ माना जाता है और ये तीनों ही मंदिर प्रयाग शक्तिपीठ की शक्ति ललिता के हैं। ये शक्तिपीठ ललिता के नाम से भी प्रसिद्ध है।

