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'वक्फ बोर्ड के आदेश पर राजस्व रिकॉर्ड में नहीं बदलेगा नाम', इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Published: Fri, 02 Oct 2026 11:38 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड जिलाधिकारी को वक्फ संपत्ति के राजस्व अभिलेख में नाम बदलने का निर्देश नहीं दे सकता।

राजस्व अभिलेख में नामांतरण का आदेश नहीं दे सकता वक्फ बोर्ड: हाई कोर्ट

राजस्व अभिलेख में नामांतरण का आदेश नहीं दे सकता वक्फ बोर्ड: हाई कोर्ट

HighLights

  1. वक्फ बोर्ड जिलाधिकारी को राजस्व अभिलेख बदलने का निर्देश नहीं दे सकता

  2. राजस्व अभिलेख में नामांतरण के लिए राजस्व संहिता प्रक्रिया अनिवार्य है

  3. हाई कोर्ट ने याची की याचिका खारिज कर सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा

विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड जिलाधिकारी को वक्फ संपत्ति के राजस्व अभिलेख में किसी व्यक्ति का नाम दर्ज करने, हटाने या बदलने का निर्देश नहीं दे सकता।

ऐसे मामलों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने यह फैसला शम्स तबरेज की याचिका खारिज करते हुए दिया।

याची का कहना था कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ ने प्रतापगढ़ के वक्फ संख्या 1339 में 13 जनवरी 2025 को कासिम नदीम का नाम हटाकर उसे प्रबंध समिति का सचिव नियुक्त किया था। याची चाहता था कि इसी आदेश के आधार पर राजस्व अभिलेख में भी नाम बदले जाने के लिए जिलाधिकारी को निर्देश दिया जाए।

याची की ओर से कहा गया कि वक्फ अधिनियम की धारा 28 के तहत बोर्ड जिलाधिकारी को निर्देश देने का अधिकार रखता है। राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि राजस्व अभिलेख में नामांतरण के लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 34 में विशेष प्रक्रिया निर्धारित है।

कोर्ट ने कहा कि जब किसी विषय के लिए विशेष कानून में प्रक्रिया तय है तो सामान्य शक्ति के आधार पर उसे दरकिनार नहीं किया जा सकता। वक्फ अधिनियम की धारा 41 के तहत बोर्ड वक्फ रजिस्टर में बदलाव कर सकता है, लेकिन राजस्व अभिलेख में नामांतरण का अधिकार संबंधित तहसीलदार को है। धारा 34 के तहत तहसीलदार दावे और आपत्तियों पर विचार करने के बाद नामांतरण का आदेश पारित करता है।

इस धारा में जिलाधिकारी को नामांतरण का अधिकार नहीं दिया गया है। इसलिए वह वक्फ बोर्ड के निर्देश पर राजस्व अभिलेख में नाम बदलने के लिए बाध्य नहीं है। हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याची को धारा 34 के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष नामांतरण के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता दी है।