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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 10, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

लखनऊ: स्टॉक में रखे थे, फिर भी कर डाली खरीद; संस्कृति विभाग में वाद्य यंत्र घोटाले में अब नया राजफाश

By Jagran NewsEdited By: Aysha Sheikh
Published: Sat, 10 May 2025 06:00 AM (IST)

लखनऊ के संस्कृति विभाग में वाद्य यंत्र घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। विभाग ने दोगुने दाम पर वाद्य यंत्र खरीदे ...और पढ़ें

स्टाक में रखे थे वाद्य यंत्र, कमाई को फिर भी कर डाली खरीद
स्टाक में रखे थे वाद्य यंत्र, कमाई को फिर भी कर डाली खरीद

HighLights

  1. दोगुने दाम पर वाद्य यंत्रों की खरीद।
  2. वित्तीय वर्ष के वाद्य यंत्रों का वितरण नहीं।
  3. पर्यटन मंत्री ने दिए जांच के आदेश।

दिलीप शर्मा, लखनऊ। संस्कृति विभाग में वाद्य यंत्र घोटाले में अब नया राजफाश हुआ है। जिस समय सामान्य से दो गुणा से अधिक कीमत पर वाद्य यंत्रों की खरीद की गई, उस समय विभाग के पास इनका स्टाक भी मौजूद था। ऐसे में वितरण के लिए नई खरीद की आवश्यकता पर ही प्रश्न उठ रहे हैं।

वहीं स्टाक में जो वाद्य यंत्र रखे हैं, उनकी खरीद वित्तीय वर्ष 2023-24 में की गई थी, परंतु विभाग ने उनका वितरण ही नहीं किया। माना जा रहा है कि इस खरीद में भी गड़बड़ी की गई थी। पर्यटन मंत्री द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद इस मामले को भी अधिक कीमत पर खरीद को लेकर पहले से चल रही जांच में शामिल कर दिया गया है।

लोक कल्याण वाद्य यंत्र योजना के तहत संस्कृति विभाग द्वारा लोक कलाकारों को किट वितरित की जाती है। पिछले दिनों उप्र सरकार के कार्यकाल में आठ वर्ष पूर्ण होने पर लोक कलाकारों को वाद्य यंत्रों की किट वितरित किए जाने के निर्देश दिए गए थे।

इस किट में हारमोनियम, तबला, घुंघरू व मजीरा सहित पांच प्रकार के वाद्य यंत्र शामिल हैं। वितरण ऐसी 825 किट की खरीद की गई थी। मामले में शिकायत होने के बाद जांच शुरू हुई तो सामने आया कि विभाग ने सहायक निदेशक की अध्यक्षता में क्रय समिति का गठन किया था।

इस समिति ने अधिक कीमत पर खरीद की संस्तुति की। जिसके बाद 12 हजार रुपये के औसत मूल्य वाली वाद्य यंत्रों की किट 32,800 रुपये क्रय की गई थी। प्राथमिक जांच के आधार पर सहायक निदेशक डा. राजेश अहिरवार व वैयक्तिक सहायक कुलदीप सिंह को निलंबित किया जा चुका है। किट के वितरण और भुगतान पर भी रोक लगा दी गई है।

घोटाला सामने आने के बाद पर्यटन मंत्री ने इससे पूर्व हुई खरीद और वितरण की भी जानकारी तलब की थी। इसमें सामने आया कि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में खरीदे गए वाद्य यंत्र अब तक विभाग के पास ही रखे हुए हैं। यंत्रों का वितरण नहीं किया गया या उनकी आवश्यकता से अधिक संख्या में खरीद हुई?

इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो पर्यटन मंत्री ने इस प्रकरण में भी जांच के आदेश दे दिए हैं। माना जा रहा है कि खरीद घोटाले में निलंबित किए गए अधिकारियों के अलावा कई अन्य नाम भी इस घोटाले में सामने आ सकते हैं।

जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की नीति भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की है। खरीद घोटाले की जांच का जांच का दायरा बढ़ाते हुए इस प्रकरण को भी उसमें शामिल कर दिया गया है। इसमें भी वाद्य यंत्रों की कीमतों, गुणवत्ता के साथ वितरण न होने के कारणों को भी जांचा जाएगा। रिपोर्ट मिलने पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी।

कैसी समीक्षा कर रहे थे अधिकारी

खरीद घोटाला सामने के बाद अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठ रहे हैं। विभाग में आए दिन बैठकें कर कार्याें-योजनाओं आदि की समीक्षा की जाती है। ऐसे में खरीद के बाद भी वाद्य यंत्र किट का वितरण न होने के मामले को किसी के द्वारा में संज्ञान नहीं लिया गया। प्रश्न उठ रहा है कि अधिकारी इस गड़बड़ी को पकड़ नहीं पाए या फिर जांच कराने की जरूरत ही नहीं समझी गई थी।