लखनऊ [जितेंद्र उपाध्याय]। पहले बेटियों के बारे में एक आम धारणा होती थी कि थोड़ा पढ़ा-लिखाकर अच्छे घर में ब्याह कर दो बस जिंदगी सफल। समय के साथ चीजें बदलीं तो धीरे-धीरे मानसिकता भी बदली, लेकिन इसे बदलने के पीछे जिस इच्छाशक्ति की जरूरत होती है, उसी का एक उदाहरण हैं इच्छा पटेल। मानसिक मंदित बेटी को लेकर पिता परेशान तो रहते थे पर पराजित नहीं हुए। उन्होंने बेटी को वेटलिफ्टिंग और पॉवरलिफ्टिंग की ट्रेनिंग दी। आज इच्छा के बाजुओं की शक्ति से पिता का सीना चौड़ा हो जाता है।

अलीगंज के बड़ा चांदगंज की रहने वाली इच्छा पटेल शहर का मान बढ़ा रही है। डाक विभाग में नौकरी करने वाले वेटलिफ्टिंग में लक्ष्मण पुरस्कार प्राप्त पिता ललित कुमार पटेल ही इच्छा के गुरु भी हैं। इच्छा गुवाहाटी में हो रहे खेलो इंडिया में हिस्सा लेने गई हैं। पावर लिफ्टिंग में भी वह सब जूनियर वर्ग की चैम्पियन बन चुकी हैं। वर्ष 2018 में जिला पॉवरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में इच्छा ने 84 किग्रा वर्ग में पहला स्थान हासिल किया था। इसी साल वेटलिफ्टिंग में वह चैंपियन बनीं। विशेष खिलाड़ी के तौर पर भी उन्होंने अक्टूबर 2018 में प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया था।

पिछले साल प्रदेश स्तरीय विशेष खेलकूद प्रतियोगिता में भी इच्छा ने पॉवरलिफ्टिंग में 81 किग्रा वर्ग में 260 किग्रा वजन उठाकर पहला स्थान प्राप्त किया। अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह एक सिल्वर और तीन कांस्य पदक के साथ चार पदक जीत चुकी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर दो गोल्ड और दो कांस्य पदक के साथ चार मेडल अपने नाम किया है। जिला स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 15 गोल्ड, छह सिल्वर और छह कांस्य पदक जीतने वाली इच्छा खेल में देश का नाम रोशन करने का जज्बा रखती हैं। 

 

Posted By: Divyansh Rastogi

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस