लखनऊ, जेएनएन। समय पर थायरॉयड की जांच न होने से महिलाओं का गर्भपात तक हो सकता है। ऐसे में, पहली बार मां बनने जा रहीं महिलाओं को अन्य जांचों सहित थायरॉयड की जांच भी बेहद जरूरी होती है। वहीं, एंटी नेटल चेकअप (एएनसी) प्रोफाइल में थायरॉयड की जांच अनिवार्य होने से भी अब महिला अस्पतालों की ओपीडी में थायरॉयड के मरीज सामने आ रहे हैं।

डफरिन में हर महीने 60 से 90 मरीजों की जांच

डफरिन की ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों में थायरॉयड के लगभग तीन-चार मरीज रोज सामने आ रहे हैं। पैथोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीन कहते हैं कि एएनसी जांच में हर महीने 60 से 90 मरीज थायरॉयड के निकल रहे हैं। गर्मी की अपेक्षा सर्दियों में ओपीडी कम होती है इसलिए इस समय मरीज भी कम निकल रहे हैं।

थायरॉयड मरीजों में जल्दी गर्भ नहीं ठहरता

डफरिन की एसआइसी डॉ. नीरा जैन कहती हैं कि थायरॉयड की यदि समय पर जांच न हो तो ऐसी महिलाओं का जल्दी गर्भ ही नहीं ठहरता और यदि ठहरता भी है तो बार-बार गर्भपात हो जाता है। बच्चे कम विकसित होते हैं।

करीब 20 से 30 फीसद मामले आ रहे सामने

लोहिया संस्थान के हॉस्पिटल ब्लॉक में एमएस डॉ. सरिता सक्सेना कहती हैं कि पहले थायरॉयड जांच नहीं होती थी। मगर, लाइफ स्टाइल बिगडऩे से यह रोग भी बढ़ा है। जांच में 20-30 फीसद केस निकल रहे हैं।

मां-बच्चे में हार्ट की समस्या

झलकारीबाई में सीएमएस डॉ. सुधा वर्मा कहती हैं कि समय पर जांच न होने से बच्चे को हार्ट की समस्या, जन्मजात विकलांगता हो सकती है। वहीं, डिलीवरी के समय पल्स रेट बढऩा, पसीना आना जैसी हार्ट की दिक्कतें हो सकती हैं। ओपीडी में करीब पांच सौ मरीज आते हैं, जिनमें दस में से चार मरीज थायरॉयड के होते हैं।

Posted By: Anurag Gupta

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