लखनऊ, जेएनएन। भ्रष्ट हो चुकी सरकारी सेवाओं और तंत्र की संवेदनहीनता के चलते एक मां के सामने ही उसके चार साल के लाल की सांसें उखड़ गईं। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मां-बेटा अस्पताल में तड़पते रहे और डॉक्टर ने यह कहकर परिसर में खड़ी एंबुलेंस से ट्रॉमा सेंटर भेजने से इन्कार कर दिया कि इससे तो केवल वीआइपी मरीज ही भेजे जाते हैं। लाचार मां के सामने ही उसका जिगर का टुकड़ा सरकारी तंत्र का शिकार हो गया और अब वह ट्रॉमा सेंटर में जिंदगी और मौत से जूझ रही है। यह हाल किसी दूर-दराज के इलाके का नहीं बल्कि राजधानी के सरोजनीनगर सीएचसी का है, जहां शुक्रवार शाम को मानवता को शर्मसार करने वाली घटना हुई।

ये है पूरा मामला 

राजाजीपुरम के जलालपुर फाटक निवासी सोनी (32) अपने भाई को राखी बांधने स्कूटी से उन्नाव गई थीं। उसके साथ चार वर्षीय बेटा आयुष भी था। शुक्रवार शाम को हाइडिल चौराहे के पास विपरीत दिशा से आ रहे एक हाफ डाला ने टक्कर मारते हुए रौंद दिया। सोनी व आयुष बुरी तरह जख्मी हो गए। खून से लथपथ सोनी व आयुष को शाम को सरोजनी नगर सीएचसी लाया गया, जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने ट्रॉमा सेंटर ले जाने को कहा। परिजन राजेंद्र सिंह का कहना है कि परिसर में एंबुलेंस खड़ी थी, लेकिन डॉक्टर ने यह कहते हुए देने से मना कर दिया कि यह तो केवल वीआइपी के लिए है।

दो घंटे तक तड़पते रहे मां-बेटा

परिजन राजेंद्र सिंह के मुताबिक बुरी तरह घायल मां-बेटे दो घंटे तक तड़पते रहे। गुहार लगाई लेकिन कर्मचारियों ने एंबुलेंस नहीं दी। इसके बाद पारिवारिक मित्र शिवा ने 108 एंबुलेंस को कॉल की। मगर, एंबुलेंस नहीं मिल सकी। समय निकलता गया और दोनों के शरीर से काफी रक्तस्राव हो चुका था।

कार से लेकर निकले, उखड़ गई बच्चे की सांस

परिजन राजेंद्र सिंह के मुताबिक एंबुलेंस नहीं मिलने पर निजी कार बुक कर बच्चे व मां को लेकर ट्रॉमा सेंटर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में बच्चे की मौत हो गई। सोनी की हालत गंभीर बनी हुई है। उनका कहना है कि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। थाना प्रभारी प्रमेंद्र कुमार सिंह के मुताबिक चालक की तलाश की जा रही है।

मां की हालत नाजुक, बेटे की मौत की जानकारी नहीं

घायल सोनी को नहीं मालूम कि जिस आयुष को वह कुछ देर पहले बिस्कुट दिलाकर आई है अब वह इस दुनिया में नहीं है। सोनी के सिर में गंभीर चोट है। इसके अलावा पसली में भी फ्रैक्चर है। ट्रॉमा सेंटर प्रवक्ता डॉ. संदीप तिवारी के मुताबिक सोनी की हालत अभी नाजुक बनी हुई है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार ?

  • 108 एंबुलेंस सेवा यूपी सीओओ धनंजय के मुताबिक, डिटेल चेक कराई गई। कॉल आई थी। पता व अन्य जानकारी पूछने पर उधर से फोन कट कर दिया गया। कॉल सेंटर से वापस कॉल की गई। उन लोगों ने निजी वाहन से मरीज को ले जाने की बात कहकर एंबुलेंस की जरूरत से इन्कार कर दिया।
  • सीएचसी सरोजनीनगर के प्रभारी डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि मरीज को रेफर करने के लिए 108 एंबुलेंस दी जाती है। सीएचसी में खड़ी एंबुलेंस वीआइपी ड्यूटी के लिए रहती हैं। इससे मरीज नहीं भेजे जाते हैं।
  • सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल के मुताबिक, मामला गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी। 108 एंबुलेंस न मिलने पर सीएचसी की एंबुलेंस से भी मरीज को भेजा जा सकता है। प्रभारी से जवाब-तलब किया जाएगा। साथ ही 108 एंबुलेंस समय पर न आने पर कंपनी पर एफआइआर कराई जाएगी।

 

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