लखनऊ[जागरण संवाददाता]। जिस वक्त झोपड़ी जल रही थी। मुकेश अपने लापता बच्चे को खोजने में जुटा था, लेकिन झोपड़ियों से उठ रहे घुंए का गुबार इतका भीषण था कि लोग कुछ समझ ही नहीं पा रहे थे। आग जब बुझकर शात हुई तो पता चला कि मुकेश का बेटा देव झोपड़ी के अंदर ही जलकर खाक हो गया। देव की मौसी मनीषा अग्निकाड की सूचना पाकर दौड़ती भागती, वहा पहुंची और देव का जला हुआ शव देखकर जोर-जोर से चीखने-चिल्लाने लगी। उसके बाद जब मुकेश मौके पर पहुंचा तो देखा कि उसकी जिगर का टुकड़ा देव जला हुआ झुग्गी में पड़ा हुआ था। भड़की चिंगारी ने जला दिए आशियानें

गोमतीनगर में वेव मॉल के पीछे बेहनन पुरवा स्थित झुग्गियो में गैस रीफिलिंग के दौरान सिलिंडर फटने से आग लग गई। अग्निकाड में एक झोपड़ी में सो रहे दो वर्षीय मासूम देव जिंदा जल गया। बस्ती में स्थित 25 झोपड़िया और उसमें रखी सारी गृहस्थी जलकर राख हो गई। हादसे के बाद आरोपित गैस दुकानदार धर्मवीर भाग निकला। आगजनी के वक्त ज्यादातर लोग अपने काम में गए हुए थे। महिलाएं भी झोपड़ियों में नहीं थी। इसी बीच एक भड़की चिंगारी ने सभी के आशियानों को जलाकर खाक कर दिया। आक्रोशित लोगों ने लोहिया अस्पताल के पास सड़क जाम कर जमकर हंगामा किया और पुलिस से धक्का-मुक्की की। आला अधिकारियों ने उन्हें समझाकर शात कराया।

अपने-अपने काम में गए हुए लोग

राजमिस्त्री मुकेश ने बताया कि पत्‍‌नी माया चौका बर्तन करती है। उसे यह बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उसका जिगर का टुकड़ा झोपड़ी के अंदर ही सोते-सोते जलकर खाक हो रहा था। मुकेश की पत्‍‌नी माया काम पर गई हुई थी, इसलिए उसे अंदाजा था कि उसका बेटा देव भी उसके साथ ही होगा। इनमें ज्यादातार लोग बिलासपुर और बाग्लादेशी रहते हैं।

इनकी झोपड़िया जलीं

कुलदीप, मो. असलम, गीता, रेशमा, आनंद, रीमा, परशुराम, चिरौंजी, मो. मैकू, आनंद बहादुर, शबनम, बड़े उर्फ गुड्डा, शमशुद्दीन, पवन, मनीष, कैलाश समेत 25 लोगों की झोपड़िया जलकर खाक हो गईं। बच्चे की मौत के बाद पुलिसवालों के साथ लोगों की नोकझोंक भी हुई

By Jagran