जागरण संवाददाता, लखनऊ। शहर को संवारने के लिए विकास के मानकों को पूरा करना होगा। महज सरकारी व्यवस्था पर निर्भर रहने से न तो राजधानी स्वच्छ होगी न ही विकसित। हर क्षेत्र की व्यवस्था में खामियां हैं। इसे दुरुस्त करने और अपने शहर को संवारने में हम सभी अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। 'माय सिटी माय प्राइड' अभियान के तहत आयोजित राउंड टेबल कांफ्रेंस में यह संकल्प शनिवार को विशेषज्ञों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों व सामाजिक संगठनों और कारपोरेट सेक्टर के प्रतिनिधियों ने लिए।

मीराबाई मार्ग स्थित 'दैनिक जागरण' कार्यालय में आयोजित कांफ्रेंस के दौरान राजधानी में स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन, इकोनॉमी व सुरक्षा की स्थिति व इसमें सुधार की संभावनाओं पर मंथन किया गया। इन पांचों विषयों पर पूर्व में अलग-अलग आयोजित हो चुकी कांफ्रेंस में पारित प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने अधिकांश प्रस्तावों पर सहमति जताई। साथ ही कुछ में संशोधन के लिए सुझाव दिए। इस बात का भरोसा भी दिया कि शहर के विकास में वह बढ़-चढ़कर अपनी जिम्मेदारियों व कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। साथ ही सरकारी विभागों का सहयोग देकर व्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। कांफ्रेंस में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के अलावा विशिष्ट अतिथि के रूप में अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिम) विकास त्रिपाठी, जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी अमरकांत सिंह व अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अजय राजा मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने शहर को नंबर वन बनाने में अपना योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई।

 

चौतरफा हो रहे सुरक्षा के उपाय
अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिम) विकास त्रिपाठी ने कहा कि महिलाओं से जुड़ी घटनाएं समाज में अशांति पैदा करती हैं। इन वारदातों की रोकथाम के लिए जन जागरूकता जरूरी है। पुलिस विभाग की ओर से महिलाओं की सुनवायी के लिए थानों में महिला कर्मियों की तैनाती करके हेल्प डेस्क की शुरुआत की गई है। साथ ही एंटी रोमियो दस्ता, शक्ति मोबाइल व नारी सुरक्षा दल के जरिए भी घटनाओं पर नियंत्रण किया जा रहा है। अपराधियों पर सीधी नजर रखने के लिए शहर में तीन स्तरों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा रहे हैं। घरेलू नौकरों और किराएदारों का सत्यापन किया जा रहा है। शहर में चौतरफा सुरक्षा के उपाय हो रहे हैं।

सभी के सहयोग से सुधारेंगे शिक्षा का स्तर
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने कहा कि शहर के विकास की बात सभी स्वीकार करते हैं, लेकिन संयुक्त रूप से सहयोग नहीं देते। यदि अधिकारी व सामाजिक संगठन मिलकर काम करें तो बेहतर नतीजे आएंगे। शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग अपेक्षित है। विद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर दुरुस्त करने की जरूरत है। शिक्षकों को भी जिम्मेदारीसमझनी होगी। फीस नियंत्रण अध्यादेश आने से आम लोग भी बच्चों को निजी
स्कूलों में पढ़ा सकेंगे। हम छात्रों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्हें प्रेरित करने के लिए हर क्षेत्र के एक्सपर्ट को विद्यालयों में बुलाएंगे। इसके लिए प्रधानाचार्यों को निर्देश भी जारी करेंगे।

विशेषज्ञों की मदद से सुधारेंगे पठन-पाठन
बेसिक शिक्षा अधिकारी अमरकांत सिंह ने कहा कि शहर के विकास में स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता है, लेकिन इसके लिए सबसे जरूरी शिक्षा है। बच्चे शिक्षित होंगे तभी वे दूसरों को सम्मान देंगे। स्कूलों की व्यवस्था सुधारने पर बेसिक शिक्षा विभाग जोर दे रहा है। कायाकल्प अभियान के तहत विद्यालयों की दशा बदल भी रही है। इसमें जन सहयोग मिले तो और बेहतर नतीजे आएंगे। जो सामाजिक संगठन बेसिक स्कूलों में पठन-पाठन में सहयोग देना चाहते हैं, उनका प्रधानाचार्यों से समन्वय कराया जाएगा। इसके लिए हम स्कूलों को निर्देश भी जारी करेंगे।

अब सीएचसी में खुली ब्लड बैंक यूनिट
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अजय राजा ने कहा कि स्वास्थ्य बेहतर होगा तो विकास में लोगों का योगदान बढ़ेगा। इसीलिए शहर में 52 स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा बलरामपुर अस्पताल, केजीएमयू, सिविल व पीजीआइ में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था मुहैया कराने पर जोर दिया जा रहा है। आज के दौर में कुपोषण के चलते बड़ी संख्या में लोग एनीमिया के शिकार हैं। खून की कमी के कारण किसी की मौत न हो इसके लिए सीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को विभिन्न ब्लड बैंकों से लिंक किया गया है। माल, गोसाईंगंज व मलिहाबाद के स्वास्थ्य केंद्र पर विशेष सेवाएं भी दी जा रही हैं। चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर करने में सामाजिक संगठनों को सहयोग देने और लेने में भी हम तत्पर हैं।

जागरूकता से होगा सुधार
उप्र. प्रोविंशिएल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार यादव ने कहा कि शहर को स्वच्छ बनाने के साथ ही स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने की जरूरत है, लेकिन यह तभी संभव होगा, जब लोग एकजुट होंगे और अपना योगदान देंगे। बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहतर खानपान व पोषण होना चाहिए। यहां एक लाख से अधिक डॉक्टर, टीचर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। यदि वे लोगों को जागरूक करें तो स्वास्थ्य के प्रति सजगता बढ़ जाएगी। शहरों की व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ ही उनका पलायन रोकना होगा। इसके लिए हम सभी मिलजुल कर काम करेंगे।

शहर के विकास में योगदान देने के लिए हमने नक्खास, भूतनाथ, आलमबाग, अमीनाबाद व चौक को मॉडल बाजार चुना है। यहां स्वच्छता के लिए काम किया जा रहा है। हम 2000 डस्टबिन बाजारों में लगवाएंगे और सीसीटीवी लगवाने के लिए व्यापारी साथियों को जागरूक करेंगे।
- अमरनाथ मिश्र, वरिष्ठ महामंत्री, व्यापार मंडल।

शहर के विकास में एजुकेशन बड़ा मुद्दा है। ऐसे में हमारी कोशिश है कि युवाओं को एजुकेशन के साथ स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग भी दी जाए। इसके लिए हम विभागों व संगठनों के साथ काम करने को भी तत्पर हैं। बेरोजगार युवक हमारे केंद्रों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार पा सकते हैं।
-धीरेंद्र तिवारी, कार्यकारी निदेशक, महिंद्रा ग्रुप।

स्वच्छता का स्वास्थ्य से सीधा संबंध होता है। ऐसे में बेहतर सेहत के लिए साफ-सफाई बहुत जरूरी है। हम कैंसर पीडि़त बच्चों की चिकित्सकीय मदद करते हैं। हमारे सहयोग की जिस क्षेत्र में भी आवश्यकता होगी संस्था हर संभव प्रयास करेगी।
-सुधा चंद्रा, सचिव लायंस क्लब।

शहर में गरीब तबके के लोगों की भोजन, वस्त्र जैसी मूलभूत जरूरतें भी नहीं पूरी हो रही हैं। हम पदाधिकारियों के सहयोग से ऐसे गरीबों की मदद करते हैं। उनका रहन-सहन बेहतर बनाने में विभागों को सहयोग देने में भी उत्सुक हैं।
-कल्पना सक्सेना, लायंस क्लब।

सरकारी प्राइमरी स्कूलों में ज्यादातर गरीब बच्चे ही पढ़ते हैं। वहां रोजगार उन्मुख शिक्षा नहीं दी जाती। ऐसे में उन्हें हुनरमंद बनाने के लिए स्किल सेंटर खोला जाना चाहिए। हम भी इसमें मदद कर सकते हैं।
-यूपी त्रिपाठी, आइ केयर इंडिया।

स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक किया जाए तो वे सरकारी अभियान में योगदान भी देंगे। हम जोन-दो में स्वच्छता व पौधरोपण अभियान चला रहे हैं। इसके इतर हमारी छह इकाइयां गरीबों की मदद के लिए हर पल तैयार हैं।
- संतोष पटेल, धनवंतरि सेवा संस्थान।

हम शहर के मरीजों को स्थानीय स्तर पर सेवाएं दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ब्लड की कमी से मौतें न हों, इसके लिए ब्लड बैंकों से समन्वय कर काम करते हैं। इसी कड़ी में व्हील चेयर आदि की व्यवस्था भी करेंगे।
-गौरव पांडेय, धनवंतरि सेवा संस्थान।

सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए पुलिस-प्रशासन को संगठनों का भी सहयोग लेना चाहिए। इसके अलावा ब्लड डोनेशन कैंप लगाने में हमसे कोई भी मदद ले सकता है।
-वाईपी सिंह, पति परिवार कल्याण समिति।

शहर में अपराध बढ़ रहे हैं। वारदातों की रोकथाम के लिए पुलिस ड्यूटी में विस्तार के साथ ही नागरिकों में जागरूकता की जरूरत है। हम जन जागरूकता लाने में सहयोग देंगे। किसी जरूरतमंद की सुनवायी न हो रही हो तो हम पुलिस के पास खुद ले जाते हैं।
-विकास सिंह, अधिवक्ता।

हम मलिन बस्तियों में बच्चों की शिक्षा का प्रबंध करते हैं। साथ ही महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बना रहे हैं। 350 महिलाओं को रोजगार से जोड़ा है। इस वर्ष 750 महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का लक्ष्य रखा है। कोई भी जरूरतमंद महिला संपर्क कर सकती है।
-शालिनी सिंह, सिटीजन फाउंडेशन।

हम अस्पतालों में भोजन और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करते हैं ताकि तीमारदारों को भटकना न पड़े। यह पहल गरीब राहगीरों के लिए भी कर रहे हैं। अब हर प्रमुख चौराहे पर भोजन की व्यवस्था करेंगे।
- विशाल सिंह, प्रसादम सेवा।

हमने चकपुरवा गांव को गोद लिया है। वहां एजुकेशन सेंटर चला रहे हैं। इसके साथ ही शहर में पौधरोपण अभियान भी चला रहे हैं। रसूलपुर को डिजिटल विलेज बनाने के लिए भी काम कर रहे हैं। बोल सकने वाले बेरोजगार निशक्त युवाओं को रोजगार देंगे।
-अभिजीत विशेन, एमडी, इंडिया प्लांटेशन।

सामाजिक एकजुटता से ही विकास होगा। हमने लोगों के सहयोग से जानकीपुरम सेक्टर छह में पांच पार्कों को संवारा है। जन समस्याओं के निस्तारण के लिए सेवा सहयोग केंद्र खोला गया है। कोई भी परेशान शहरी हमसे मदद ले सकता है।
-पंकज तिवारी, जन विकास महासभा।

शहर में जागरूकता के अभाव में ही हेपेटाइटिस बी के मरीजों की तादात बढ़ रही है। ऐसे मरीजों के वैक्सीनेशन व स्क्रीनिंग में हम विभाग की मदद के लिए तैयार हैं।
- राजेश ओझा, प्रोजेक्ट हेड, होप इनीसिएटिव।

स्कूलों में बच्चों को गुड और बैड टच के बारे में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही बच्चों को एजुकेशन गेम, मूवी आदि के जरिए आसानी से जागरूक किया जा सकता है। हमारी संस्था 100 स्कूलों में अभियान चलाने में
शिक्षा विभाग की मदद कर सकती है।
-आयुषी शुक्ला, रीजनल ट्रेनर, होप इनीसिएटिव।

शहर में अपराध करने वालों में अधिकांश बाहरी लोग हैं। ऐसे में स्कूलों में प्राइवेट ड्राइवरों का भी वेरीफिकेशन होना चाहिए। पुलिस के सहयोग के लिए शिक्षकों को ट्रेनिंग भी दी जा सकती है।
-शैलेष गुप्ता, सचिव, आदर्श अभिभावक समिति।

स्कूल में छोटी-छोटी घटनाएं हो रही हैं। इसके लिए स्टूडेंट हेल्प सपोर्ट सिस्टम बनाया जाना चाहिए। हम अपनी समिति के माध्यम से इसमें सहयोग दे सकते हैं। शिक्षकों को फस्र्ट एड का भी प्रशिक्षण दिलाया जाना चाहिए।
-भूपेंद्र सिंह, कोषाध्यक्ष, आदर्श अभिभावक समिति।

अपराधों पर नियंत्रण के लिए घरेलू नौकरों के सत्यापन की व्यवस्था पूरी तरह लागू हो। इसके अलावा स्वच्छता में सभी का योगदान होना चाहिए। हमने 35 स्कूलों में टायलेट बनवाए हैं और विद्यालयों में भी ऐसी व्यवस्था करेंगे।
-आलोक सिंह, सोशल एंड टेक इंटरप्रेन्योर।

शहर में व्यापारी सुरक्षित नहीं हैं। घटनाएं दिनोंदिन बढ़ रही हैं। ऐसे में हर चौराहों पर सीसी कैमरे लगवाए जाने चाहिए। व्यापार मंडल इस कार्य में पुलिस-प्रशासन को सहयोग देने को तैयार है।
-उत्तम कपूर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष लखनऊ व्यापार मंडल।

राजधानी में पार्किंग की बड़ी समस्या है। रोड पर वाहनों के पार्किंग से जाम लगता है। इसके इतर अतिक्रमण की समस्या नासूर बनी है। इसमें व्यापार मंडल पुलिस-प्रशासन का सहयोग करेगा।
- देवेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, भूतनाथ व्यापार मंडल।

हमने विकास नगर में ई-लर्निंग सेंटर खोला है। शिक्षकों को अध्यापन का प्रशिक्षण देने के साथ ही अधेड़ लोगों को शिक्षित भी करते हैं। गांवों में भी ऐसे सेंटर खोले जाने चाहिए। हम इसमें विभाग की मदद करेंगे। हमारी संस्था
हैप्पी स्कूल योजना के तहत स्कूलों को गोद लेकर उनकी मदद करती है।
-उत्तरा भार्गव, इनर व्हील क्लब।

मैं महिलाओं को हैंडीक्राफ्ट की ट्रेनिंग देती हूं। साथ लोगों से पुराने कपड़े लेकर उसके थैले बनाती हूं। इन थैलों को निश्शुल्क ड्राइवरों व अन्य लोगों को बांट देते हैं। ताकि इधर-उधर कचरा फेंकने की बजाए उसमें रखें।
बेरोजगार महिलाएं हमसे प्रशिक्षण हासिल कर सकती हैं।
-श्रद्धा सक्सेना, अंश वेलफेयर फाउंडेशन।

वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं को दूर करने के लिए हम काम करते हैं। 42 संगठनों को अपने साथ जोड़ा है। जरूरत पड़ी तो प्रशासन के साथ मिलकर जरूरतमंदों की मदद भी करेंगे।
एसके बाजपेयी, वरिष्ठ नागरिक जनकल्याण समिति।

वरिष्ठ नागरिकों को कैसे खुश रखा जाए, इसके लिए हम हर संभव प्रयास करते हैं। साथ ही वृद्धाश्रम आदि में बुजुर्गों की जरूरत की व्यवस्थाएं करते हैं। प्रशासन को हर स्तर से सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
-जीसी सिंघल, महासचिव, वरिष्ठ नागरिक जनकल्याण समिति।

बंदी गृहों में महिलाओं व बच्चों की शिक्षा की बेहतर व्यवस्था की जानी चाहिए। इसमें संस्थाओं का सहयोग भी लिया जा सकता है। हमारी संस्था इस क्षेत्र में अधिकारियों की मदद कर सकती है।
-विनीता श्रीवास्तव, महिला कल्याण समिति।

 

By Gaurav Tiwari