सामाजिक चेतना यूं ही नहीं आती, उसे जगाना पड़ता है। सरोकारों के प्रति सजगता व्यक्ति की कर्तव्यनिष्ठा को बयां करती है। गोमती को हम गोमा कहते हैं, पर हमारी उपेक्षा से उनका जीवन खतरे में पड़ गया है। हम जिस प्रकृति की गोद में वास करते हैं, उसका क्षरण करने में भी बेपरवाह हैं। ऐसे में लोगों को जागरूक करने का जिम्मा शहर के युवा ऋद्धि किशोर गौड़ ने उठाया है। वह न किसी से चंदा लेते हैं न ही प्रशासनिक मदद। बस, जनता के श्रम और सहयोग से मिशन को मुकाम तक पहुंचाने में जुटे हैं, ताकि शहर को प्राकृतिक संपदा से समृद्ध बना सकें।

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राजधानी के चौपटिया निवासी ऋद्धि अपने जीवन के 43 बसंत देख चुके हैं। वह शहर में सात वर्षों से भोजन की कैंटीन चलाते हैं। पिता राम किशोर गौड़ की प्रेरणा से जल व पर्यावरण संरक्षण से जुड़े। 30 वर्ष की आयु में साथियों के सहयोग से गोमती नदी के संरक्षण की मुहिम शुरू की। कुड़िया घाट की साफ-सफाई के साथ रोजाना शाम को गोमा की आरती शुरू करायी। जल संरक्षण के लिए पुराने लखनऊ में संदोहन देवी कुंड व कुंओं का जीर्णोद्धार कराया। रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं, साथ ही भूजल श्रोतों को पुनर्जीवित भी कराते हैं। 

गरीबों का मददगार बना रोटी-कपड़ा बैंक 

ऋद्धि किशोर सामाजिक सरोकारों के इतर गरीबों के उत्थान के लिए भी काम करते हैं। वर्ष 2014 में उन्होंने रोटी कपड़ा बैंक की स्थापना की। यह बैंक लोगों से वस्त्र जमा कराता है और हर गुरुवार गरीबों की बस्ती में जरूरतमंदों का बांटता है। आर्थिक सहयोग किसी से नहीं लेते। वह भिखारियों को भीख के रूप में पैसे न देकर उन्हें भोजन मुहैया कराते हैं। सीजन में अनाज इकट्ठा करते हैं और समय-समय पर गरीबों में बांटते हैं।

बनवाते हैं विसर्जन कुंड, ताकि प्रदूषित न हों गोमा 

गोमती नदी में प्रति वर्ष हजारों मूर्तियों का विसर्जन कराने से प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है। ऋद्धि हमेशा से इसके खिलाफ रहे। कोर्ट के निर्देश के बावजूद नदी में प्रतिमाओं का विसर्जन होता रहा और प्रशासन मूक दर्शक बना रहा। इस स्थिति में वह साथियों के संग आगे आए और नदी किनारे कच्चे विसर्जन कुंड बनवाए। उनकी अपील को लोगों ने सुना और अब अधिकांश श्रद्धालु उसी कुंड में प्रतिमाओं का विसर्जन करने लगे हैं। वह अब मंदिरों में अभिषेक के लिए उपयोग होने वाले जल का संचयन करने की कवायद में जुटे हैं। इसके लिए मंदिरों के बगल ही वाटर टैंक बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। इस जल को पौधों की सिंचाई और अन्य कार्यों में उपयोग किया जाएगा।

चुनौतियां: किया विरोध का सामना, फिर भी डटे रहे
कुड़िया घाट पर गोमती आरती कराने के निर्णय पर कुछ लोग विरोध में खड़े हो गए थे। पहली बार शुरू हुई गोमा की आरती बंद होने के आसार दिखने लगे। विरोधियों ने माइक के तार काट दिए। थाने में उनके और साथियों के खिलाफ तहरीर दी। पूछताछ के बाद मौके पर पुलिस ने जांच की। जन सहयोग को देखते हुए आरती कराने की अनुमति मिल गई। कहते हैं, सामाजिक कार्यों का विरोध तो होता ही है। पर, अच्छे लोगों के जुड़ने से काम आसान होता गया।

सुझाव- ये हो तो बने बात

  • गोमती में 27 नाले गिर रहे हैं, जो प्रदूषण का प्रमुख कारण हैं। इन्हें बंद कराया जाना चाहिए।
  • नदी की स्वच्छता के लिए सरकारी स्तर पर ठोस प्रयास हो। जन सहयोग से अभियान चलाया जाए।
  • भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए नदी, कुआं, तलहटी और तालाबों में जल संचयन के प्रयास हों।
  • गांवों में मनरेगा से तालाब खुदवाए जाते हैं, लेकिन अगले वर्ष वजूद मिट जाता है। इसके लिए ठोस योजना बने।
  • पर्यावरण संरक्षण के लिए हरित पट्टियां विकसित की जाएं। पेड़ों की कटान पर रोकथाम लगे।
  • पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नदियों को जोड़ने की पहल की थी, इसे हकीकत में होना चाहिए।

By Krishan Kumar