जागरण संवाददाता, लखनऊ : शहर की मलिन बस्तियों में आज भी अशिक्षा का अंधेरा छट नहीं सका है। महिलाओं व बुजुर्गों का एक बड़ा तबका निरक्षर है। वहीं, गरीबी से जूझ रहे परिवार के बच्चे कॉपी-किताब देखने के लिए तरस जाते हैं। इन बच्चों की पढ़ाई में भारत विकास परिषद मददगार बन रहा है। संगठन की 'समर्पण' शाखा नौनिहालों की पढ़ाई के लिए समर्पित है। उन्हें मुफ्त में कॉपी और किताब दिलाते हैं, बच्चों की फीस भी जमा कर रहे हैं। भारत विकास परिषद की स्थापना 1963 में हुई थी। वर्ष 2005 में लखनऊ में परिषद की पांच शाखाएं खोली गईं। इन्हीं में एक है समर्पण शाखा।

इसके सदस्य एक दशक से शहर में बच्चों की शिक्षा का प्रबंध कर रहे हैं। इसके लिए संस्था हर वर्ष की कार्ययोजना बनाती है। उसके अनुसार बच्चों को कॉपी किताब, बैग फ्री में मुहैया कराए जाते हैं। बच्चों को भारतीय सभ्यता से परिचित कराने के लिए संस्कार शाला आयोजित कराते हैं। इसमें उन्हें भाषा, विचार, व्यवहार आदि का पाठ पढ़ाया जाता है। समर्पण शाखा के अध्यक्ष दिनेश चंद्र मौर्या बताते हैं कि 172 सदस्यों के सहयोग से सामाजिक कार्य किए जाते हैं।

फीस का उठाया जिम्मा
शाखा के कार्यकारिणी सदस्य ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी ने बताया कि बाल निकुंज विद्यालय अलीगंज में पढऩे वाले छह बच्चों की फीस संस्था जमा कर रही है। इस वर्ष श्रीराम औद्योगिक अनाथालय अलीगंज में छह अनाथ बच्चियों को पढ़ाने का भी जिम्मा संस्था ने लिया है। उन्हें किताबें व स्टेशनरी मुहैया कराई जा रही है। गत वर्ष कई बच्चों को स्वेटर बांटे गए। इस बार 51 बच्चों को सर्दी की ड्रेस के लिए चयनित किया गया है।

बच्चों की प्रतिभा को दिला रहे मंच
भारत विकास परिषद की ओर से बच्चों की प्रतिभा को मंच भी दिलाया जाता है। राष्ट्रीय स्तर तक की समूह गायन प्रतियोगिता व सामान्य ज्ञान पर आधारित 'भारत को जानो' प्रतियोगिता का आयोजन हर वर्ष कराया जाता है। इसके साथ हीमहापुरुषों के इतिहास पर वाद-विवाद प्रतियोगिता कराई जाती है। शिक्षक दिवस पर गुरु व शिष्यों को सम्मानित करने के साथ बच्चों में शिष्टाचार, मानवीय मूल्यों का ज्ञान, अनुशासन आदि का पाठ पढ़ाने के लिए शिविर लगाए जाते हैं। बच्चों को क्राफ्ट, रंगोली आदि का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। 

बालिकाओं के उत्थान के लिए कोष
बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए भारत विकास परिषद ने बालिका उत्थान कोष की स्थापना की है। इसके तहत जरूरतमंद बालिकाओं की आर्थिक मदद करते हैं। साथ ही मानसिक रूप से सशक्त बनाते हैं। गरीब बच्चियों का चयन कर उनकी शिक्षा का जिम्मा भी उठाते हैं। जरूरत पडऩे पर बच्चियों के परिजनों को विधिक सहायता भी दिलाई जाती है। इसके लिए उनसे संस्था कोई शुल्क नहीं लेती।

By Krishan Kumar