शहर का विकास करने और विभिन्न मानकों पर खरा उतरने के लिए सबको एक होना होगा। सिर्फ शासन-सरकार से अपेक्षा करना बेमानी है। हर क्षेत्र में सुधार के लिए जन सहयोग भी जरूरी है। लोग खुद भी सेहत, स्वच्छता, सुरक्षा के प्रति सजग रहें। शहर को साफ रखने से लेकर यातायात नियंत्रण तक में सहयोग करें। सरकार सबसे पहले इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करे। इससे अन्य सुधार कार्यक्रम चलाने में भी आसानी होगी।

शहर को संवारने से जुड़े ये बहुमूल्य सुझाव शनिवार को माय सिटी माय प्राइड अभियान के तहत आयोजित राउंड टेबल कांफ्रेंस में विशेषज्ञों ने दिए। दैनिक जागरण के मीराबाई मार्ग स्थित कार्यालय में आयोजित कांफ्रेंस के दौरान राजधानी में स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन, इकोनॉमी और सुरक्षा की स्थिति पर मंथन किया गया। इन पांचों विषयों पर पूर्व में अलग-अलग आयोजित हो चुकी कांफ्रेंस में पारित प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।

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विशेषज्ञों ने पूर्व में पारित प्रस्तावों में अधिकांश पर सहमति जताई। साथ ही कुछ संशोधन भी कराए। कांफ्रेंस में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के अलावा पूर्व
मंत्री व विधायक रविदास मेहरोत्रा, पूर्व विधायक विद्यासागर गुप्त के अलावा सेवानिवृत्त आइएएस और गृहमंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी विशेष रूप से मौजूद रहे।

हर विधानसभा क्षेत्र में बने एंबुलेंस प्वाइंट
हर गरीब को गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिल सके इसके लिए हर सक्षम व्यक्ति को कम से कम एक गरीब बच्चे को उत्कृष्ट शिक्षा देने के लिए गोद लेना चाहिए। इसके साथ ही सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं मिले इसके लिए हर विधानसभा क्षेत्र में एक एंबुलेंस प्वाइंट खोला जाए, जिससे बीमारों को आसानी से अस्पताल तक पहुंचाया जा सकता है। गरीबों के इलाज की सुलभ व्यवस्था के लिए चैरिटी की भी जरूरत है। वहीं शहर को सुंदर बनाने की कल्पना जाम और गंदगी से निजात के बगैर बेमानी होगी। इसके लिए अतिक्रमण के साथ ही शहर से डेयरियां हटाने की जरूरत है।
- विद्यासागर गुप्ता, पूर्व विधायक

पटरी दुकानदारों के स्थाई नियोजन को प्राथमिकता
शहर को स्मार्ट बनाने की ओर हम आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन अतिक्रमण और जाम से निजात दिलाने की पहल शुरू नहीं हो पा रही। मेट्रो शहर की श्रेणी में हम
खड़े हैं, लेकिन सीवेज सिस्टम ठीक नहीं है। कैसरबाग क्षेत्र को स्मार्ट बनाने की मुहिम भी अब दिखाई नहीं पड़ती। पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। पटरी दुकानदारों को स्थाई करने का कोई इंतजाम नहीं है। शहर से गुजर रहे हैदर कैनाल को ढककर उसके किनारे पटरी दुकानदारों को बसा दिया जाए तो शहर के जाम से निपटा जा सकता है। इस दिशा में प्रयास करने होंगे। अस्पताल पहुंचने वाले गरीब मरीजों व उनके तीमारदारों को पार्किंग शुल्क से मुक्ति मिलनी चाहिए।
- रविदास मेहरोत्रा, पूर्व मंत्री

समग्र विकास सबसे बड़ी चुनौती
शहर जब तक जाम, अतिक्रमण, सीवेज निस्तारण न होने, जर्जर सड़कों और पेयजल आपूर्ति दुरुस्त न होने जैसी समस्याओं से ग्रस्त होगा, तब तक औद्योगिक विकास नहीं होगा। औद्योगिक विकास नहीं होगा तो आर्थिक समृद्धता कैसे आएगी? इसके बगैर समान शिक्षा का अधिकार कैसे मिल पाएगा? स्वास्थ्य सुविधाएं भी बेहतर नहीं हो पाएंगी। सुरक्षा का भी अभाव रहेगा। आज शहर के जिन चौराहों से प्रति घंटे नौ से 10 हजार वाहन गुजर रहे हैं वहां ओवर ब्रिज बनाने पर जोर देना होगा। उद्योगों को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों का विकास करना होगा, जिससे पारंपरिक उद्योगों को आगे बढ़ाया जा सके। क्राइम रोकने के लिए सभी को सक्रिय होना होगा। सबके विकास के बगैर शहर का विकास नहीं हो सकता। यह प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती है जिसमे आम लोगों की सशक्त भागीदारी जरूरी है।
- दिवाकर त्रिपाठी, सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी

किसने क्या-कहा?

शहर में कूड़े के निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं है। अगर हम खुद चेतें और कचरा इधर-उधर न फेंकें तो गंदगी कम हो सकती है। बढ़ती आबादी के साथ ही
राजधानी में रोजगार का भी संकट है। सरकार पॉलीटेक्निक संस्थाओं का विस्तार करे।
- वीके जोशी, पूर्व निदेशक, जीएसआइ।

कचरा निस्तारण का मास्टर प्लान तैयार किया जाए। 40 फीसद आर्गेनिक कचरा होता है। इसको रिसाइकिल कर उपयोगी बनाया जा सकता है। छोटे एसटीपी लगाए जाएं। कुकरैल और हैदर कैनाल नाले पर अतिक्रमण है, इसे हटाया जाए। ताकि प्राकृतिक जल के निकासी के रास्ते खुल सकें।
- डॉ. वेंकटेश दत्ता, प्रोफेसर, बीबीएयू।

प्रदूषण के चलते लोगों को अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसे रोग हो रहे हैं। कच्ची सड़कों पर उड़ती धूल एलर्जी बढ़ा देती है। इसके ठोस उपाय किए जाने चाहिए। सड़क, पुल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उसमें निर्माणकर्ता एजेंसी या ठेकेदार का नाम भी डाला जाए।
- डॉ. रेनू जैन, स्त्री रोग विशेषज्ञ।

दिव्यांग प्रमाण पत्र हफ्ते में सिर्फ एक दिन ही बनता है। इसके लिए शिविर लगाए जाएं। अस्पतालों और स्कूलों में ऐसे बच्चों के लिए सुविधाएं भी बढ़ाई जाएं।
- स्वाति शर्मा, प्रिसिंपल, आशा ज्योति विशेष विद्यालय।

अस्पतालों में तीमारदारों के लिए खानपान की व्यवस्था पर सरकार को भी ध्यान देना चाहिए। आपदा नियंत्रण में सामाजिक संगठनों का भी सहयोग लिया जा सकता है। बुजुर्गों के केंद्रों को दुरुस्त किया जाए।
- विशाल सिंह, प्रबंधक, विजयश्री फाउंडेशन (प्रसादम् सेवा)

देश में एक शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए। वन बुक, वन सिलेबस व्यवस्था हो। स्कूलों में हाईस्कूल से ही रोजगार उन्मुख शिक्षा
दिए जाने की व्यवस्था बनाई जाए।
- अविनाश त्रिपाठी, ट्रस्टी, सेवा पथ ट्रस्ट।

एचआइवी ग्रसित लोगों के स्वास्थ्य व सफाई पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके इतर 18 वर्ष से कम उम्र के रोगियों के लिए अलग से शिक्षा की व्यवस्था की जाए।
- आयुष अग्निहोत्री, प्रोग्राम ऑफिसर, यूपीएनपी प्लस।

गोमती नदी में नालों का गंदा पानी गिर रहा है। इसकी रोकथाम की जाए। गोमती के पानी को प्रदूषण मुक्त कर पीने योग्य भी बना सकते हैं। हालांकि जल प्रदूषण को कम करने के लिए जन जागरूकता बहुत जरूरी है। इसके लिए सरकार को प्रचार-प्रसार करना चाहिए।
- सूर्य प्रकाश पाठक, स्टेट कंसलटेंट, एनएमएचपी।

स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। मरीजों की बढ़ती तादात के सापेक्ष दवाएं और वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- श्रीकांत श्रर्मा, समाजसेवी।

शहर में और पब्लिक टायलेट बनवाए जाएं। स्वच्छ भारत मिशन चलने के बाद भी लोगों में जागरूकता की कमी है। इसके लिए व्यापक अभियान चलाया जाए। साथ ही बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष टायलेट बनाए जाएं।
- फारूख आर. खान, क्षेत्रीय प्रबंधक वाटर एड।

महिला सशक्तीकरण प्रोग्राम पर फोकस किया जाना चाहिए। सार्वजनिक स्थलों पर महिला प्रसाधन की व्यवस्था हो। स्तनपान मां और बच्चे के लिए लाभकारी है। इसके लिए सार्वजनिक स्थलों पर कक्ष बनाया जाए।
- डॉ. नीलोफर खान, यूपी पुलिस महिला सम्मान प्रकोष्ठ।

अपराधों पर रोकथाम नहीं हो पा रहा है। शहर में हर चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। ताकि क्राइम करने वाले की पहचान करने में आसानी हो।
- रेखा सिन्हा, महासचिव, रेखाकृति।

औषधीय खेती का प्रसार किया जाना चाहिए। औषधीय पौधों की वाटिका तैयार की जाए। इसमें स्कूलों और रिटायर वैज्ञानिकों की मदद भी ले सकते हैं।
- डॉ. अनिल कुमार सिंह, पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक सीमैप।

बदलाव के लिए वैचारिक परिवर्तन जरूरी है। शिक्षा में भेदभाव समाप्त होना चाहिए। जात-पात और छुआ-छूत भी बंद हो। गरीब के मुकाबले पढ़े-लिखे लोग आज
ज्यादा गड़बड़ी कर रहे हैं। दहेज उत्पीड़न की घटनाएं आज भी पढ़े-लिखे लोगों के घर में हो रही हैं।
- धीरेंद्र कुमार, कार्यकारी निदेशक, महेंद्रा स्किल्स।

अस्पतालों में दवाओं की कमी है। स्वाइन फ्लू की वैक्सीन है ही नहीं। मलेरिया का प्रकोप बढ़ रहा है। इसके लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए।
- एसपी राय, सदस्य, स्वच्छ वातावरण प्रोत्साहन समिति।

स्मार्ट सिटी में हम पीछे रह गए। इसका कारण है हमारी सोच। स्वच्छता तभी आएगी जब हमारी सोच अच्छी होगी। हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझना चाहिए।
- अजय सिंह, अध्यक्ष, स्वच्छ वातावरण प्रोत्साहन समिति।

 

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By Nandlal Sharma