लखनऊ, जागरण संवाददाता। दीपावली नजदीक है। इस दौरान पटाखों के धुएं के साथ बदलते मौसम की वजह से भी प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। गुरुवार को दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर कार्यक्रम में किंग जॉज मेडिकल विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में रेस्पिरेट्री मेडिसिन की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. ज्योति बाजपेई ने बताया कि 12 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से ग्रस्त रोगियों को पटाखों से होने वाले धुएं और बदलते मौसम में बढऩे वाले प्रदूषण से ज्यादा सुरक्षित रखने की जरूरत है। इसके लिए ब'चों-बुजुर्गों और सांस रोगियों को पटाखों से दूर रखना होगा। साथ ही उन्हें मास्क लगाकर रखना होगा। मास्क कोरोना के साथ धूल, धुएं और प्रदूषण से भी रक्षा करेगा। पेश हैं प्रमुख सवाल और उनके जवाब-

मुझे अप्रैल में कोरोना हुआ था। अब सांस फूलती है और खांसी भी आती है? - दीपक खार, लहरपुर, सीतापुर

कोरोना के काफी मरीजों में इस तरह का पोस्ट कोविड असर देखा गया है। अगर ऐसा है तो आप मंगलवार को केजीएमयू की रेस्पिरेट्री मेडिसिन की ओपीडी में आकर अपना लंग्स फंक्शन टेस्ट (एलफटी) करवा लें। हो सकता है यह फाइब्रोसिस हो। काफी मरीजों में कोरोना से ठीक होने के बाद फाइब्रोसिस हो रहा है। अगर पल्मोनरी फंक्शन ठीक से काम कर रहा है तो यह बदलते मौसम में अस्थमा और बढऩे की वजह से भी हो सकता है।

दीपावली के दौरान एलर्जी और अस्थमा रोगी अपना बचाव कैसे करें?- एसएन मिश्रा, सुलतानपुर

इस दौरान ब'चों, बुजुर्गों और सांस रोगियों को सबसे ज्यादा सावधान रहना चाहिए। ब'चों का फेफड़ा 12 वर्ष तक पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाता है। ऐसे में उनके फेफड़े के कार्य करने की क्षमता भी कम होती है, इसलिए सबसे ज्यादा ध्यान ब'चों का रखना होगा। उन्हें पटाखों से दूर रखें। मास्क लगाएं। इसी तरह बुजुर्गों की सांस नली भी बढ़ती उम्र के साथ सिकुड़ती है। उनमें सांस लेने की कार्यक्षमता भी कम हो जाती है। इसी तरह दमा, अस्थमा और पुराने सांस रोगियों में सांस लेने की क्षमता पहले से कम होती है। इस दौरान मास्क लगाकर रखना होगा। दीपावली के एक दिन पहले और एक दिन बाद तक ब'चों-बुजुर्गों और सांस रोगियों को घर में ही रहना चाहिए। पटाखों के धुएं में खतरनाक कॉपर, कैडमियम, स्ट्रांसियम होते हैं। इनके धुएं से निकलने वाला पोटैशियम परफोलेट सांस रोगियों के लिए बहुत हानिकारक होता है।

मुझे सांस की दिक्कत हो रही है। सुबह कफ बन जाता है? - धनलाल गुप्ता, कटरा बाजार, गोंडा

अगर आप पहले से अस्थमा के मरीज हैं और इन्हेलर ले रहे हैं तो उसे नियमित लेते रहें। इस दौरान मौसम बदल रहा है। दीपावली भी आ रही है। ऐसे में धूल, धुआं और प्रदूषण की मात्रा बढ़ेगी। इससे आपको बचना होगा। एक बार आप यहां आकर दिखा लें। हो सकता है आपके इन्हेलर की मात्रा बढ़ाने की जरूरत हो, जो जांच के बाद ही पता चलेगा, मगर मेरी सलाह है कि हर सांस रोगी को जिसका इन्हेलर चल रहा है, उसे नियमित लेते रहना चाहिए। बीच-बीच में बंद करने से आप अपनी समस्याएं बढ़ा लेते हैं। सर्दियों में हर सांस के मरीज का अस्थमा एक्शन प्लान बनाना जरूरी होता है। 60 फीसद लोग तो ठीक से इन्हेलर ले ही नहीं पाते।

मुझे 24 घंटे खांसी आती रहती है। केजीएमयू समेत बहुत जगह दिखाया, लेकिन आराम नहीं मिल रहा? - सुधीर कुमार, बाराबंकी

आप मंगलवार को केजीएमयू आएं। यह अस्थमा, एलर्जी या गंभीर सांस की बीमारी हो सकती है। कुछ एलर्जी का पता लगाना कई बार बेहद मुश्किल हो जाता है। यहां आने तक आप डाक्टर की बताई दवाएं, परहेज को फालो करें। निश्चित आपको आराम मिलेगा।

मैं नियमित रूप से इन्हेलर ले रहा हूं। फिर भी खांसी आती रहती है? - जगदीश बख्श सि‍ंह, अयोध्या

अगर आपके फेफड़े की जांच में अस्थमा या दमा का पता चल चुका है तो दवाएं और इन्हेलर नियमित लेते रहें। इन्हेलर लेते समय रोगी इस बात का ध्यान रखें कि रोज अपने पफ को पानी से साफ करना है। हर छह महीने पर इन्हेलर बदलते भी रहें। डाक्टर के बताए अनुसार कोई भी डोज लेना नहीं भूलें।

आठ वर्ष से मेरे फेफड़े का इलाज चल रहा है। कोरोना काल में दिखा नहीं पाए। क्या बिना जांच कराए ओपीडी में दिखा सकते हैं?  -कृष्णकांत धर द्विवेदी, गोंडा

आठ वर्ष से इलाज चल रहा है तो आपको सीओपीडी या अस्थमा है। डाक्टर ने आपको बताया भी होगा। हर छह महीने में इसका फालोअप जरूरी होता है। यदि आपको कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है तो सीधे ओपीडी में आकर दिखा सकते हैं। दोनों डोज नहीं ली तो कोरोना की आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट के साथ मंगलवार को आना होगा।

मुझे सांस की तकलीफ रहती है। इन्हेलर और दवा नियमित ले रहे। तब भी आराम नहीं मिल रहा? - रामनरेश शुक्ला, हैदरगढ़

एलर्जी का स्तर कई बार बढ़ जाता है तो लगता है कि दवाओं और इन्हेलर से आराम नहीं मिल रहा। हो सकता है कि आपके इन्हेलर की मात्रा एलर्जी के अनुपात में बढ़ाने की जरूरत हो। एक बार आप ओपीडी में आकर दिखा लें। मास्क जरूर लगाएं। पटाखों के धुएं, धूल और प्रदूषण से दूर रहें।

मुझे अक्सर एलर्जी रहती है, जो ठंड में बढ़ जाती है? - अवधेश सि‍ंह, गोंडा

यह एलर्जिक राइनोसाइटिस का लक्षण हो सकता है। अगर इसमें नाक में मांस बढ़ता है तो नाक के अंदर सूजन, छींक आना, पानी बहना इत्यादि समस्या हो सकती है। यदि सांस की नली में साइनोसाइटिस है तो सांस में तकलीफ, खांसी जैसी मुश्किल होती है। नाक में बढ़े मांस का आपरेशन हो सकता है। एक बार आप ईएनटी के किसी डाक्टर को दिखा लें। सांस में दिक्कत हो तो केजीएमयू के रेस्पिरेट्री ओपीडी में आ सकते हैं। इसके लिए आप आनलाइन या 0522-2258880 पर फोन करके पंजीकरण करा सकते हैं। साइनोसाइटिस में तो अब कई बायोलॉजिकल दवाएं आ गई हैं, जो बेहद कारगर हैं।

मुझे सुबह के वक्त सांस की दिक्कत होती है। धूप खिलने पर सही हो जाती है? - बद्री नारायण तिवारी, रायबरेली

यह एलर्जी की शुरुआत हो सकती है। ध्यान नहीं दिया तो अस्थमा या सीओपीडी में बदल सकती है। आप ओपीडी में आकर दिखा लें। अगर पहले से कहीं दिखाया है और इन्हेलर चल रहा है तो उसे लेते रहें। ओपीडी आते समय सभी रोगी अपना इन्हेलर और रिकॉर्ड साथ में लाएं।

Edited By: Anurag Gupta