लखनऊ, जेएनएन। तकरोही के गीत व‍िहार कालोनी के एक मकान में मंगलवार देर रात आग लग गई। आग लगने से छह माह की मासूम बच्ची सहित घर में मौजूद पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। सभी को लोहिया अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। मौत का कारण दम घुटना बताया जा रहा है। जिस घर में आग लगी उसमें गैस चूल्हे का गोदाम भी था। जहां रबर की पाइप और गैस लाइटर भी था। रबर के कारण आग तेजी से बढ़ी।

वहीं स्थानीय लोगों के मुताबिक कई बार फोन करने के बावजूद एंबुलेंस, फायर सर्विस और पुलिस को मौके पर पहुंचने में डेढ़ से दो घंटे लग गए। वह बिना उपकरण के आए थे तो स्थानीय लोगों की मदद से चार को करीब दो घंटे की जेद्दोजेहद के बाद निकालकर लोहिया अस्पताल भेजा गया। जबकि एक युवती का शव घर के बाथरूम में छह घंटे बाद बरामद हो सका। 

घटना मंगलवार रात करीब एक बजे की है। तकरोही के गीत व‍िहार कालोनी में टीआर सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके घर के एसी में रात करीब डेढ़ बजे शार्ट सर्किट से आग लग गई। जिस समय घर की दूसरी मंजिल पर आग लगी उस समय टीआर सिंह के बेटे सुमित सिंह (31), सुमित की पत्नी जूली सिंह (28), उनकी छह माह की बेटी बेबी, सुमित सिंह की बहन वंदना (22) और टीआर सिंह का भांजा डब्ल्यू सिंह (48) घर में थे। आग लगने के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस, फायर और एंबुलेंस को फोन किया। फायर सर्विस करीब एक घंटे बाद पहुंची। बिजली की आपूर्ति बंद कराकर आग बुझाने का काम शुरू किया गया।

स्थानीय लोगों की मदद से सुबह चार बजे सुमित सिंह, जूली सिंह, बेबी और डब्ल्यू सिंह को बाहर निकाला गया। उनको तुरंत लोहिया अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। वहीं घर में पीछे से जेसीबी की मदद से बड़ा छेद करके दमकलकर्मी भीतर घुसे। छह घंटे बाद घर के बाथरूम से वंदना का शव भी बरामद किया गया। 

दम घुटने से हुई मौत 
रात को 12:30 से एक बजे के बीच दो बार क्षेत्र की बिजली गई। इसके बाद शार्ट सर्किट से घर में आग लग गई। बताया जाता है कि जिस समय आग लगी उस समय परिवार बालकनी में था। उनकी मौत जलकर नहीं बल्कि आग के बाद निकले धुएं के कारण दम घुटने की बात डॉक्टरों ने बतायी। 

दो साल पहले आया था परिवार
टीआर सिंह के बेटे सुमित सिंह की शादी दो साल पहले ही हुई थी। पूरा परिवार प्रतापगढ़ में रहता था। लखनऊ में इंदिरानगर में उनकी गैस चूल्हा और उपकरण की दुकान है। जबकि घर के भूतल पर इसका पूरा गोदाम है। सुमित शादी के बाद पूरे परिवार सहित लखनऊ आ गए थे। 

टार्च तक नहीं 
स्थानीय युवक अनुज सिंह ने बताया कि अग्निशमन वालों के पास टार्च जैसे उपकरण नहीं थे। किसी तरह इंतजाम किया तो वह भीतर जाने को तैयार नहीं थे। पुलिस भी मूकदर्शक बनी रही। स्थानीय युवक चादर ओढ़कर भीतर घुसे थे। तब जाकर चार लोगों को दो घंटे बाद ढूंढकर बाहर निकाला जा सका। 

उठाने के लिए करते रहे मोबाइल फोन
टीआर सिंह के घर के सामने रहने वाले मायाराम यादव रात डेढ़ बजे पानी पीने के लिए उठे थे। उन्होंने आग की लपटें उठती हुई देखी। तुरंत बेटे मनीष और पत्नी को जगाया। सुमित को बाहर से बहुत आवाज लगायी। उनका मोबाइल फोन कई बार लगाया। लेकिन फोन नहीं उठा। बाहर से पत्थर घर पर बरसाए गए। तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

इन युवकों ने लगायी जान की बाजी


क्षेत्र के युवक रिषभ सिंह राठौर और अनुज सिंह ने जान की परवाह किए बिना सुमित और उनके परिवार को बचाने का बहुत प्रयास किया। उनके साथ मायाराम यादव और क्षेत्र के अन्य लोग भी प्रयास करते रहे। 

बिजली ने पहुंचायी बाधा
हादसे के बाद क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति बंद कर दी गई। इस कारण लोगों के घरों में लगे सबमर्सिबल पम्प भी नहीं चल सके। ऐसे में फायर सर्विस के आने का वह इंतजार करते रहे। एक गाड़ी आयी ही थी कि कुछ देर में उसका पानी खत्म हो गया। 

तारों का मकडज़ाल 
जिस कालोनी में आग लगी। वहां के पूरे इलाके में लोहे के खंभे आज भी लगे हुए हैं। वहां एबीसी की जगह उनपर तारों का मकडज़ाल बना हुआ है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में कुछ लोग बिजली की चोरी भी करते हैं। वह लोग भारी उपकरण इस्तेमाल करते हैं जिससे क्षेत्र के तार ओवरलोड हैं। आए दिन ओवरलोड होने से बिजली कट जाती है। जबकि बारिश के समय घरों में करंट भी उतर आता है।  

 

Posted By: Anurag Gupta

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