लखनऊ [ कुसुम भारती ] आज प्रॉमिस डे है। ये दिन अपनों से वादे करने और उन किये गए वादों को निभाने के लिए खास है। वादा तो सिर्फ वादा है जिसे निभाने के लिए मन में संकल्प और दृढ़ विश्वास होना चाहिए। कौन, कितना और कैसे इसे निभाता है, यह तो समय आने पर पता चलता है। लेकिन, ऐसे कुछ शादीशुदा जोड़े हैं जो एक-दूसरे से किए वादों को आज भी पूरी ईमानदारी और मोहब्बत से निभा रहे हैं। उनका मानना है कि वादा करना तो आसान होता है, पर निभाना बड़ा मुश्किल होता है। मगर, आपसी प्यार और विश्वास के साथ आसानी से निभाया जा सकता है।

हर परिस्थिति में साथ निभाने का वादा
ज्योति व संतोष शुक्ला कहते हैं, शादी से पहले सबसे बड़ा वादा हमने एक-दूसरे को समझने, तालमेल रखने व हर परिस्थिति में साथ रहने का किया था। जो हम बखूबी निभा रहे हैं। हां, एक वादा जो नहीं पूरा हुआ दोनों से वह फिटनेस को लेकर है। हम दोनों ही खाने-पीने के शौकीन हैं, जिसके चलते हम दोनों अपने वजन को बढऩे से रोक नहीं कर पा रहे हैं। बहरहाल, शादी के छह वर्ष बीत चुके हैं। अब बाहरी सुंदरता से हमें फर्क नहीं पड़ता, इस वादे के साथ हर जिंदगी में साथ रहने का इरादा है।

पूरा किया अपना घर बनाने का वादा
पति-पत्नी का रिश्ता ही एक ऐसा इकलौता व करीबी रिश्ता होता है जो जन्म के बाद जुड़ता है। एक-दूसरे को उसकी अच्छाइयों व कमियों के साथ अपनाना होता है। एक करार के तौर पर एक-दूसरे के साथ जीवन बिताते हैं, यही सबसे महत्वपूर्ण वादा होता है। शोभा व आनंद कुमार शर्मा कहते हैं, कुछ वादे हमने भी आपस में किए थे। शादी के बाद खुद का घर बनाने का वादा हमने पूरा किया। हालांकि, यह मुश्किल भी था, पर हमने मेहनत से इसे साकार किया।

आपसी प्यार और समझदारी जरूरी
जिंदगी बड़ी आसानी से चल रही है। तीन बच्चों और घर की जिम्मेदारी को दोनों मिलकर संभाल रहे हैं। ममता व आदित्य सिंह कहते हैं, यदि आपस में प्यार और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान किया जाए तो बिना मांगे ही सारे वादे पूरे हो जाते हैं। एक लड़की अपना घर छोड़कर जब ससुराल जाती है तो उसे प्यार, सम्मान व अधिकार देने का वादा जरूर पूरा होना चाहिए, तभी जिंदगी की गाड़ी आसानी से चलेगी। प्यार व समझदारी से शादी के 22 सालों का सफर यहां तक पहुंचा है, आगे भी इसी तरह तय करेंगे।

समर्पण के साथ निभाएं जाएं वादे
किसी की भावनाओं से खिलवाड़ करना बुरा है। दिखावे के लिए किए गए वादों का कोई मतलब नहीं होता। युवाओं के वादे हर दूसरे दिन टूट जाते हैं, उनको अपने पेरेंट्स से सीखना चाहिए कि वे किस तरह से प्रॉमिस निभाते हैं। डॉ. सृष्टि श्रीवास्तव व केके अस्थाना कहते हैं, शादी के समय हमने एक-दूसरे से जो वादे किए थे, वे 31 साल बाद भी उसी प्रेम व समर्पण के साथ निभा रहे हैं।

Posted By: Anurag Gupta