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बीमा के नाम पर करोड़ों ठगने वाली मधुमिता रांची से गिरफ्तार, लखनऊ में 14 साल पहले दर्ज हुआ था मुकदमा

Published: Wed, 21 Oct 2026 07:49 PM (IST)

आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने बीमा पॉलिसी धोखाधड़ी मामले में वी-केयर मल्टीट्रेड की सीईओ मधुमिता कौर को रांची से गिरफ्तार किया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. मधुमिता कौर बीमा धोखाधड़ी मामले में रांची से गिरफ्तार।

  2. वी-केयर मल्टीट्रेड की सीईओ पर करोड़ों की ठगी का आरोप।

  3. आकर्षक लाभ का झांसा देकर प्रीमियम नहीं भरा।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। बीमा पॉलिसी के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने वी-केयर मल्टीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर एवं सीईओ मधुमिता कौर को झारखंड के रांची से गिरफ्तार किया है।

आरोप है कि कंपनी ने आकर्षक लाभ का प्रलोभन देकर लोगों से बीमा पॉलिसी कराईं और बाद में दूसरे वर्ष का प्रीमियम जमा नहीं किया। इस प्रकरण में विभिन्न थानों में कंपनी के विरुद्ध कुल 26 मुकदमे दर्ज हैं।

2012 में दर्ज हुआ था मुकदमा

ईओडब्ल्यू के अनुसार, लखनऊ के कृष्णानगर थाने में वर्ष 2012 में दर्ज मुकदमे से संबंधित जांच के दौरान आरोपित की तलाश की जा रही थी। टीम ने 18 अक्टूबर को रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र से मधुमिता कौर को गिरफ्तार किया। वह रांची के पीपी कंपाउंड क्षेत्र की निवासी है। 19 अक्टूबर को रांची की अदालत से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे लखनऊ लाया गया। यहां न्यायालय में पेश कर उसके विरुद्ध आगे की विधिक कार्रवाई की गई।

दिल्ली और हरियाणा में हुआ था कंपनी का पंजीकरण

जांच के अनुसार, वी-केयर मल्टीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड का पंजीकरण वर्ष 2008-09 में दिल्ली और हरियाणा में हुआ था। कंपनी ने लखनऊ के कृष्णानगर में क्षेत्रीय कार्यालय खोलकर रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस और एगान लाइफ इंश्योरेंस जैसी कंपनियों की पॉलिसी कराने पर आकर्षक लाभ का प्रलोभन दिया था।

दूसरे वर्ष का प्रीमियम जमा करने का झांसा

कंपनी की योजना के तहत लोगों को अपने परिचितों और अन्य व्यक्तियों की बीमा पॉलिसी कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। इसके बदले दूसरे वर्ष की प्रीमियम कंपनी की ओर से जमा करने का आश्वासन दिया जाता था।

आरोप है कि अधिक से अधिक लोगों को इस योजना से जोड़ने के बाद प्रीमियम जमा नहीं किया गया और निवेशकों की धनराशि व कमीशन का गबन कर कंपनी के संचालक कार्यालय बंद कर फरार हो गए। ईओडब्ल्यू इस मामले में आगे की विधिक कार्रवाई कर रही है।

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