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'मामले की गंभीरता को समझें डीएम', राजधानी के 80 गांवों में जल संकट पर हाई कोर्ट सख्त

Published: Wed, 30 Sep 2026 02:04 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राजधानी के 80 गांवों में जल संकट पर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी ...और पढ़ें

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HighLights

  1. लखनऊ के 80 गांवों में जल संकट पर हाई कोर्ट सख्त।

  2. जिलाधिकारी लखनऊ को मामले की गंभीरता समझने की कड़ी चेतावनी दी।

  3. वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भूमि आवंटन में देरी पर कोर्ट की नाराजगी।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। जल संकट से जूझ रहे राजधानी के 80 गांवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने जिलाधिकारी लखनऊ को चेतावनी देते हुए कहा कि मामले के महत्व और गंभीरता को समझें और ऐसी स्थिति उत्पन्न न होने दें, जिसमें न्यायालय को कोई कड़ा आदेश पारित करना पड़े। कोर्ट ने मामले से जुड़े उप जिलाधिकारियों को भी अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने उत्कर्ष लोक सेवा संस्थान की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि 19 अगस्त के आदेश के अनुपालन में प्रस्तावित पांच वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में एक के लिए बख्शी का तालाब के नगवामऊ गांव में जिलाधिकारी ने भूमि आवंटित कर दी है।

परियोजना के लिए 231.52 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत किए जाने की भी जानकारी दी गई। हालांकि 200 करोड़ रुपये से अधिक लागत होने के कारण अब इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जाना है। सरकार ने एक महीने में प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखने का आश्वासन दिया।

इस पर कोर्ट ने उम्मीद जताई कि परियोजना की आवश्यकता और ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के महत्व को देखते हुए सरकार शीघ्र निर्णय लेगी और संबंधित जल निगम को जानकारी उपलब्ध कराएगी, ताकि आगे की कार्रवाई शुरू हो सके। शेष चार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जिलाधिकारी की ओर से संक्षिप्त जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया।

इसमें कहा गया कि भूमि की पहचान की प्रक्रिया जारी है। कोर्ट ने पाया कि अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने संबंधित एसडीएम को भूमि चिह्नित करने के निर्देश 16 सितंबर को दिए, जबकि हाई कोर्ट का आदेश 19 अगस्त को ही पारित हो चुका था। इस देरी पर खंडपीठ ने नाराजगी जताई और अधिकारियों को आदेश के अनुपालन में गंभीरता बरतने की चेतावनी दी।

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