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योगी सरकार के 'डिजिटल यूपी' को रफ्तार, लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्रों का ID Card अब डिजीलॉकर पर होगा सेव

Published: Sun, 30 Aug 2026 09:01 PM (IST)

लखनऊ विश्वविद्यालय 2026-27 से छात्रों के आधिकारिक आईडी कार्ड डिजीलॉकर पर जारी करेगा, जिससे यह देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय ...और पढ़ें

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HighLights

  1. लखनऊ विश्वविद्यालय डिजीलॉकर पर आईडी कार्ड जारी करने वाला पहला राज्य।

  2. छात्रों को 2026-27 से डिजीलॉकर पर मिलेगी डिजिटल आईडी।

  3. सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल डिजिटल पहचान, PVC कार्ड की निर्भरता कम होगी।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'डिजिटल उत्तर प्रदेश' और ई-गवर्नेंस विजन को साकार करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक पहल की है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर और सभी संकायों के विद्यार्थियों के आधिकारिक आईडी कार्ड भारत सरकार के 'डिजीलॉकर' (DigiLocker) प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे। इस पहल के साथ ही, डिजीलॉकर पर स्वयं इस्यूइंग अथॉरिटी के रूप में आईडी कार्ड जारी करने वाला लखनऊ विश्वविद्यालय देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बन गया है।

अपार आईडी (APAAR ID) से लिंक होगी डिजिटल पहचान

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के विद्यार्थी-केंद्रित विजन के अनुरूप तैयार इस नई व्यवस्था के लिए छात्रों के पास भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त 'अपार आईडी' होना अनिवार्य होगा। प्रवेश और शुल्क जमा करने की प्रक्रिया पूरी होते ही विद्यार्थी का अधिकृत डिजिटल पहचान पत्र सीधे उनके डिजीलॉकर खाते में पहुंच जाएगा। इसे राज्य सरकार के पारदर्शी प्रशासन और तकनीक आधारित गुड गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

24 घंटे सुरक्षित आईडी और क्यूआर कोड से सत्यापन

इस व्यवस्था के लागू होने से विद्यार्थियों को अपना पीवीसी कार्ड हर समय साथ रखने, उसके खोने, टूटने या चोरी होने की चिंता से मुक्ति मिलेगी। डिजीलॉकर ऐप के जरिए आईडी उनके स्मार्टफोन में सुरक्षित रहेगी। इसके अलावा, डिजिटल कार्ड में मौजूद क्यूआर (QR) कोड के जरिए जरूरत पड़ने पर किसी भी अधिकृत एजेंसी द्वारा इसकी प्रामाणिकता का तुरंत सत्यापन किया जा सकेगा।

पढ़ाई पूरी होते ही कार्ड होगा निष्क्रिय, पर्यावरण को भी लाभ

सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए, यह डिजिटल आईडी कार्ड केवल छात्र की अध्ययन अवधि तक ही वैध रहेगा। कोर्स पूरा होते ही कार्ड स्वतः निष्क्रिय हो जाएगा, जिससे पुराने पहचान पत्रों के दुरुपयोग की आशंका खत्म हो जाएगी। कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी के अनुसार, यह तकनीक-संचालित व्यवस्था प्रशासनिक प्रक्रियाओं को त्वरित बनाएगी। साथ ही, पीवीसी (प्लास्टिक) कार्ड्स पर निर्भरता कम होने से विश्वविद्यालय के 'ग्रीन कैंपस' अभियान को भी बल मिलेगा।