लखनऊ : गोमती का पानी तराई और खेतों तक पहुंचा, सई के उफान ने बढ़ाई किसानों की चिंता
लखनऊ में गोमती का पानी बीकेटी और इटौंजा के तराई व खेतों तक पहुंच गया है, जबकि सई नदी का बढ़ता जलस्तर बंथरा के किसानों की चिंता बढ़ा रहा है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
बीकेटी में गोमती का पानी तराई और खेतों तक पहुंचा।
बंथरा में सई नदी के बढ़ते जलस्तर से किसान चिंतित।
प्रशासन ने गोमती का जलस्तर सामान्य बताया, बाढ़ नहीं।
जागरण टीम, लखनऊ। बारिश के बीच नदियों का बढ़ता जलस्तर अब गांवों और किसानों की चिंता बढ़ाने लगा है। बीकेटी में गोमती का पानी नालों से पलटकर तराई तक पहुंच गया है, जबकि इटौंजा में नदी किनारे खेतों में पानी भरने लगा है। बंथरा में सई नदी के बढ़े जलस्तर से पानी बनी, सैदपुर और पुरही समेत आसपास के गांवों के किसान अपनी फसलों को लेकर परेशान हैं।
हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि गोमती का जलस्तर सामान्य से नीचे है और जिले में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। गोमती बैराज के सात गेट खुलवा दिए गए हैं और प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है।
बीकेटी। गोमती का पानी अब नदी से जुड़े नालों के जरिये तराई की ओर फैलने लगा है। कठवारा की तराई में बम्भनइया घाट स्थित नाले से पानी पलटकर खेतों की ओर पहुंच गया। नदी का जलस्तर एक दिन में बढ़ने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ी है। चंद्रिका देवी तीर्थ के सुधन्वाकुंड में भी गोमती की जलधारा पहुंच गई है। हालांकि अभी पानी सड़क तक नहीं आया है और तीर्थ पर आवागमन सामान्य है।
मझउवा घाट पर नदी किनारे बनी सीढ़ियां भी पानी में डूबने लगी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर में बढ़ोतरी नहीं हुई है। पीछे से पानी नहीं छोड़ा गया तो स्थिति सामान्य रहने की उम्मीद है। क्षेत्र के लेखपालों को लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों को सता रहा डर
इटौंजा। गोमती के बढ़ते पानी से बाढ़ क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है। सुल्तानपुर, बहादुरपुर, हरदा अकड़रिया कला, खुर्द हरदा और दुघरा समेत अन्य गांवों के पास नदी का जलस्तर बढ़ा है। फिलहाल खेतों में बारिश का पानी भरा है, लेकिन किसानों को डर है कि नदी का पानी बढ़ा तो धान की फसल बर्बाद हो सकती है।
अकड़रिया खुर्द के बुजुर्ग खरगा ने बताया कि गुरुवार को गोमती में करीब छह अंगुल पानी बढ़ा था। संतोष यादव ने बताया कि जलस्तर बढ़ता रहा तो धान की फसल खतरे में पड़ सकती है। कई खेतों में पानी भर चुका है। लासा गांव में मवेशी बांधने के स्थान के पास बनी झोपड़ियों में भी पानी भर गया है। इससे ग्रामीणों को पानी के बीच ही मवेशी बांधने पड़ रहे हैं।
सई का पानी बढ़ा तो खेतों में डंडे गाड़कर निगरानी
बंथरा। सई नदी के बढ़े जलस्तर ने आसपास के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पानी बनी, सैदपुर और पुरही समेत कई गांवों के किसानों की फसलें पानी की चपेट में आ चुकी हैं। पुरही निवासी नवीन ने बताया कि धान को अभी कम नुकसान है, लेकिन तिल्ली और उड़द की फसल पानी में अधिक दिन रही तो सड़कर खराब हो सकती है।
सैदपुर में किसान नदी के पानी पर नजर रखने के लिए खेतों में डंडे गाड़ रहे हैं। किसान अशोक सिंह बताते हैं कि इससे रोजाना पता चलता रहता है कि पानी कितना बढ़ा या घटा। हालांकि पिछले दो दिनों से नदी का पानी स्थिर बताया जा रहा है। किसानों को आशंका है कि बारिश होने पर जलस्तर फिर बढ़ सकता है।
पुरसी के प्रधान मुरलीधर दीक्षित ने बताया कि कई दशकों बाद नदी का पानी इतना बढ़ा है।
वर्ष 1962 में जलस्तर बढ़ने पर पानी बनी गांव के कई मोहल्लों में घुस गया था। इसी को देखते हुए गांव के बाहर पहले ही दो बांध बनाए जा चुके हैं। उनका कहना है कि नदी का पानी इससे अधिक बढ़ा तो गांवों को खतरा हो सकता है। नदी किनारे बसे अन्य गांवों में भी बांध की जरूरत है।
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मौजूदा समय में गोमती का जलस्तर सामान्य दिनों से भी कम है। सामान्य द दिनों में गोमती का जलस्तर 105.6 मीटर व शुक्रवार को 104 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया। ऐसे में कहीं कोई ऐसी स्थिति नहीं है। -राकेश कुमार सिंह, एडीएम प्रशासन और नोडल- आपदा प्रबंधन
गोमती का जलस्तर को काफी नीचे हैं, हां सई खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। हालांकि किसी तरह की चिंता की कोई बात नहीं। -अमर सिंह,आपदा प्रबंधन विभाग
