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लखनऊ, जेएनएन। राजधानी पुलिस और जीआरपी का नया कारनामा सामने आया है। ऐशबाग में रेलवे लाइन किनारे घायल मिली युवती की मौत के बाद पहचान कराए बिना ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। पोस्टमॉर्टम हाउस में चार दिन तक युवती का शव रखा गया था, लेकिन उसकी शिनाख्त की कोशिश नहीं की गई। छह दिन बाद भी पहचान न होने पर युवती का अंतिम संस्कार कर दिया गया। युवती के पास से पुलिस को दिल्ली मेट्रो का एक कार्ड मिला था। 

ये है पूरा मामला 

दरअसल, आठ अप्रैल की रात में जीआरपी की ऐशबाग पुलिस को पीआरडी ऑफिस के बाहर युवती लहूलुहान मिली थी, जिसका बायां पैर कटा था। यही नहीं दाएं पैर का पंजा भी क्षतिग्रस्त था। ट्रामा सेंटर में दो दिन तक चले इलाज के बाद उसकी मौत हो गई थी। युवती के हाथ पर टैटू बना था और दूसरे पर अंग्रेजी में रैपिक लिखा हुआ था। पोस्टमॉर्टम हाउस के डॉक्टरों ने मामले को संदिग्ध बताते हुए पुलिस से उसकी पहचान कराने की बात कही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 

आखिरकार शनिवार (13 अप्रैल) को शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। आशंका जताई जा रही है कि युवती की हत्या की गई है। पुलिस का कहना है कि जिस समय युवती का शव मिला था, उस दौरान अवध एक्सप्रेस गुजरी थी। यह ट्रेन गोरखपुर से बांदा जाती है। फिलहाल युवती के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। जीआरपी और चौक पुलिस मामले की पड़ताल का दावा कर रही है।

Posted By: Divyansh Rastogi

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