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1.2 लीटर मवाद और पिचक चुके फेफड़े वाले मरीज की बची जान, लखनऊ पीजीआई में हाई-रिस्क वैट्स सर्जरी

Published: Mon, 14 Sep 2026 10:24 PM (IST)

संजय गांधी पीजीआई, लखनऊ के डॉक्टरों ने 1.2 लीटर मवाद और पिचक चुके फेफड़े वाले 50 वर्षीय मरीज की हाई-रिस्क वैट्स सर्जरी कर जान बचाई।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. सीने में 1.2 लीटर गाढ़ा मवाद और पिचक चुका फेफड़ा।

  2. दिल, शुगर, बीपी के पुराने मरीज की हाई-रिस्क सर्जरी।

  3. दूरबीन विधि वैट्स सर्जरी से मरीज को मिला नया जीवन।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। सीने में 1.2 लीटर गाढ़ा मवाद, फेफड़ा पूरी तरह पिचक कर ध्वस्त और ऊपर से दिल, शुगर और बीपी का पुराना मरीज... ऐसी हालत में ज्यादातर संस्थान उम्मीद ही छोड़ देते हैं, लेकिन संजय गांधी पीजीआई के एपेक्स ट्रामा सेंटर के डाक्टरों ने दूरबीन विधि वैट्स सर्जरी से 50 वर्षीय मरीज को जीवनदान दिया है।

हादसे में घायल हुए थे मेवालाल

सोनभद्र के रहने वाले मेवालाल (50 वर्ष) मेडिकल स्टोर चलाते हैं। आठ अप्रैल 2026 की रात बाइक-कार की टक्कर में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जिला अस्पताल में शुरुआती इलाज तो हुआ, लेकिन सांस की दिक्कत बढ़ती गई। हालत बिगड़ने पर उन्हें एपेक्स ट्रामा सेंटर लाया गया।

जांच में पता चला कि छाती के अंदर करीब 1.2 लीटर गाढ़ा मवाद भर चुका था, जिसे पायोथोरेक्स कहते हैं। फेफड़े के ऊपर मोटी झिल्ली की परत जम गई थी और फेफड़ा पूरी तरह दब कर काम करना बंद कर चुका था।

ऑपरेशन करना बेहद जोखिम भरा था

चुनौती और बड़ी थी, क्योंकि मेवालाल पहले से हाई-बीपी, डायबिटीज के मरीज हैं और 2023 में दिल की नस में स्टेंट भी पड़ चुका है। ऐसी नाजुक हालत में ऑपरेशन करना बेहद जोखिम भरा था। सर्जरी के दौरान मरीज को सिंगल-लंग वेंटिलेशन पर रखना पड़ा, यानी एक फेफड़े से ही सांस चलानी पड़ी।

इसके बावजूद ट्रामा सर्जरी टीम ने वैट्स तकनीक से बिना बड़ा चीरा लगाए, कैमरे की मदद से छाती से सारा मवाद निकाला और फेफड़े को जकड़े हुए मोटी पील को हटाकर डी-कॉर्टिकेशन किया। इससे दबा हुआ फेफड़ा फिर से फूल सका।

ऑपरेशन के बाद दो दिन तक मरीज को आईसीयू में रखा गया। सुधार होने पर वार्ड में शिफ्ट किया गया। 14 सितंबर को पूरी तरह स्वस्थ हालत में उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। निदेशक प्रोफेसर आरके धीमान ने टीम को बधाई दी।

क्या है वैट्स तकनीक

वैट्स का पूरा नाम है वीडियो-असिस्टेड थोरैकोस्कोपिक सर्जरी। इसमें छाती को बड़ा चीरने की जरूरत नहीं पड़ती। 2-3 छोटे छेद करके कैमरा और खास उपकरण अंदर डाले जाते हैं। मॉनिटर पर देखकर अंदर की सफाई और ऑपरेशन करते हैं। दर्द कम होता है, इंफेक्शन का खतरा कम रहता है और मरीज जल्दी ठीक होता है।

सर्जरी करने वाली टीम में एडिशनल चीफ ट्रामा सर्जरी विभाग के डा. अमित कुमार सिंह, सीनियर रेजिडेंट ट्रामा सर्जरी, डा. आदित्य सिंह, डा. वरुण गुप्ता, एनेस्थीसिया विभाग, एडिशनल प्रोफेसर डा. गणपति शामिल रहे।