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लखनऊ ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर: प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, SCR से जोड़ने की तैयारी; एलाइनमेंट के लिए रूट संशोधन

Published: Sun, 11 Oct 2026 08:06 PM (IST)

लखनऊ ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर के सर्वे का पहला चरण पूरा हो गया है, जिसमें बाराबंकी के पास एलाइनमेंट में बदलाव ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर सर्वे का पहला चरण पूरा।

  2. बाराबंकी के पास एलाइनमेंट में हुआ संशोधन।

  3. रसौली से जहांगीराबाद को जोड़ेगा कॉरिडोर।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। आउटर रिंग रोड की तरह लखनऊ जिले को बाहर से रेल नेटवर्क से कनेक्ट करने के लिए प्रस्तावित ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर के सर्वे का पहला चरण पूरा हो गया है। पहले चरण के सर्वे के बाद बाराबंकी की ओर कॉरिडोर के एलाइनमेंट में बदलाव के लिए प्रस्तावित रूट में संशोधन किया गया है। अब बाराबंकी के भीतर सफेदाबाद की जगह यह कॉरिडोर रसौली के करीब से होते हुए जहांगीराबाद को भी जोड़ेगा। सर्वे के आधार पर अब कंसलटेंट एजेंसी डीपीआर तैयार करेगी।

लखनऊ शहर के भीतर यातायात के दबाव को कम करने और औद्योगिक विकास के लिए रेल मंत्रालय ने मार्च 2025 में स्वीकृति प्रदान की थी। इस कॉरिडोर को लखनऊ जिले के सीमावर्ती सात रेलखंडों से जोड़ा जाएगा, साथ ही सुलतानपुर रेलखंड पर बड़ा व्यापारिक टर्मिनल बनेगा। मोहनलालगंज और मोहान रोड के वेयर हाउस भी इससे जुड़ेंगे।

कॉरिडोर की विशेषता

  • 170 किलोमीटर प्रस्तावित था कॉरिडोर
  • 17 किलोमीटर का और हो सकता है विस्तार
  • 2031 तक प्रोजेक्ट को पूरा करने का है लक्ष्य
  • 7 रेलखंड को एक साथ जोड़ेगा यह कॉरिडोर
  • 30 लाइनों का ग्रीन फील्ड मेगा टर्मिनल बनेगा सुलतानपुर रेलखंड पर
  • 20 से ज्यादा प्लेटफार्म होंगे इस टर्मिनल के
  • 1 मेगा रेल लाजिस्टिक पार्क बनेगा आगरा एक्सप्रेसवे के पास
  • 7500 करोड़ रुपये की आएगी कॉरिडोर को बनाने की लागत

लिडार तकनीक और जमीनी सर्वे

कॉरिडोर के सर्वे के लिए रेलवे की संस्था राइट्स, उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की टीम, रेलवे इंजीनियरों के साथ कंसलटेंट एजेंसी ने एलडीए का सहयोग लिया था। जिन हिस्सों में आबादी नहीं बसी है, वहां से ही कॉरिडोर को निकालने के लिए लिडार तकनीक और जमीनी सर्वे किया गया।

एजेंसी ने सफेदाबाद से बाराबंकी होकर शहर के भीतर और रसौली से जहांगीराबाद को जोड़ने के लिए दो विकल्प दिए थे। सर्वे के बाद रसौली से जहांगीराबाद को जोड़ने के विकल्प का चयन किया गया है। हालांकि, इससे कॉरिडोर की करीब 17 किलोमीटर की दूरी बढ़ सकती है।

यह है प्रस्तावित कॉरिडोर

कहां से कहां लंबाई (किलोमीटर में)
रसौली से अर्जुनगंज 32
अर्जुनगंज से मोहनलालगंज 16
मोहनलालगंज से पिपरसंड 25
पिपरसंड से काकोरी 21
काकोरी से बीकेटी 22
बीकेटी से जहांगीराबाद 45
जहांगीराबाद से रसौली 9
कुल लंबाई 170

रेलवे का मानना है कि स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) के लिए रसौली से जहांगीराबाद को जोड़ने का विकल्प ही बेहतर है। इससे एक साथ अयोध्या, गोंडा और बाराबंकी को आपस में जोड़ा जा सकेगा।

अब बोर्ड करेगा निर्णय

रेलवे बोर्ड की प्रोजेक्ट मानीटरिंग यूनिट को प्रारंभिक चरण के सर्वे की रिपोर्ट भेज दी गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड की यूनिट और रेलवे के निर्माण संगठन मिलकर डीपीआर तैयार करेंगे।

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