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लखनऊ नगर निगम में दबे थे नामांतरण के 206 मामले, सीएम डैशबोर्ड ने पकड़े

Published: Wed, 14 Oct 2026 04:12 PM (IST)

सीएम डैशबोर्ड ने लखनऊ नगर निगम में नामांतरण के 206 लंबित मामलों का खुलासा किया है।

लखनऊ नगर निगम।

लखनऊ नगर निगम।

HighLights

  1. सीएम डैशबोर्ड ने 206 लंबित नामांतरण मामले उजागर किए।

  2. अधिकारियों से लंबित फाइलों पर जवाब मांगा गया।

  3. नामांतरण में देरी से निगम की छवि प्रभावित।

अजय श्रीवास्तव, लखनऊ। नगर निगम में नामांतरण (म्यूटेशन) कराना आसान नहीं हैं। कतिपय कारणों से फाइलों को लटकाया जाता हैं। महापौर की मौजूदगी में होने वाले संपूर्ण समाधान दिवस में भी ऐसे मामले आते हैं, जिनमें बेवजह परेशान करने के आरोप लगते हैं।

सीएम डैशबोर्ड ने म्यूटेशन के ऐसे 206 मामले पकड़े हैं, जिनका निराकरण नहीं किया जा रहा था। सीएम दफ्तर से यह जानकारी आने के बाद अधिकारियों के हाथ पैर फूल गए हैं। संबंधित से यह जानकारी ली जा रही हैं कि फाइलों को रोकने के कौन से कारण थे और कमियों को बताने के लिए आवेदकों से किस तरह के प्रयास किए गए थे।

इसके बाद नगर निगम में अब पत्रावलियों को निकाला जा रहा है। जवाब देने के लिए संबंधित को पत्र भी लिखा गया है। यह पहला मामला नहीं है। नगर निगम में म्यूटेशन को लेकर जुगाड़ लगानी पड़ती हैं। अनुचित मांग भी की जाती है।

अभी जोन एक का ही मामला देखा जाए तो एक भवन स्वामी ने यह शिकायत की थी कि बाबू ने म्यूटेशन कराने के लिए डेढ़ लाख रुपये की मांग की अधिकारियों के संज्ञान में भी यह मामला लाया गया, लेकिन किसी ने इसको गंभीरता से नहीं लिया। नगर निगम में म्यूटेशन की व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही हैं और कुछ समय से इसको आनलाइन कर दिया गया हैं। इनकी दरों में भी परिवर्तन किया गया है।
मामला सीएम डैश बोर्ड से सामने आने के बाद मुख्य कर निर्धारण अधिकारी विनय राय ने जोनल अधिकारियों को पत्र लिखा हैं। जिनमें सीएम डैशबोर्ड पर लंबित नामांतरण (म्यूटेशन) प्रकरणों के निस्तारण एवं उत्तरदायित्व को निर्धारण करने को कहा गया है। लंबित प्रकरणों की रिपोर्ट में यह बताना होगा कि समयावधि में उनका निस्तारण क्यों नहीं किया गया। किस किस स्तर पर फाइलें लंबित रहीं। प्रत्येक लंबित प्रकरण के वास्तविक कारणों सहित स्पष्ट एवं तथ्यात्मक आख्या देनी होगी। अनावश्यक रूप से फाइलों को लंबित रखने वाले सबंधित का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए उनका स्पष्टीकरण लिया जाए। इसकी भी जानकारी दी जाए कि अगर फाइल में कोई कमी थी तो आवेदन करने वाले भवन स्वामी को उसे इसकी जानकारी दी गई कि नहीं। शासन स्तर पर इसे गंभीरता से लिए जाने के बाद अधिकारियों की तरफ से कहा गया है कि नामांतरण प्रकरणों को अनावश्यक लंबित रखने से नगर निगम की कार्यप्रणाली एवं छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हैं। इससे निगम को राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है
जोनवार कहां कितने मामले लंबित : एक में 25, दो में 14, तीन में 25, चार में सात, पांच में 26, छह में 73, सात में 11, आठ में 25।