लखनऊ, जेएनएन। UPMRC Update: एक बार फिर मेट्रो सचिवालय स्टेशन से हजरतगंज के बीच फंस गई। इससे लखनऊ मेट्रो के परिचालन अधिकारियों में हड़कंप मच गया। शुक्रवार सुबह 10:30 बजे हुई घटना की सूचना मिलते ही ऑपरेशन, रोलिंग स्टॉक व प्रबंध निदेशक यूपीएमआरसी के साथ ही मेट्रो के सुरक्षा गार्ड व स्टेशनों पर तैनात पीएएसी कर्मी भी पहुंच गए। सुरंग में काफी देर तक मेट्रो फंसी रही। इसके साथ ही उसमें बैठे यात्री भी बेहाल हो गए।

मेट्रो के सभी कोचों के दरवाजे न खुलने के कारण यात्रियों को मेट्रो ड्राइवर के केबिन में लगे इमरजेंसी डोर को खोलकर निकाला गया। ट्रैक पर ही सभी  यात्री उतरे और फिर उन्हें दो ट्रैकों के बीच में मौजूद पैसेज (इमरजेंसी दरवाजा) से निकालकर बाहर निकाला गया। इसके कुछ देर बाद मेट्रो का संचालन सामान्य हो सका। 

 

हालांकि, यह सारा अभ्यास उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) ने एक मॉक ड्रिल के रूप में किया। मॉक ड्रिल के दौरान इमरजेंसी स्टाफ व अफसरों की क्षमता का आंकलन बेहतर पाया गया।

लखनऊ मेट्रो ने आपातकालीन स्थिति में अपनी यात्री सेवाओं का आंकलन करने के लिए शुक्रवार को यह मॉकड्रिल की गई। आपातकालीन स्थिति में यात्रियों के सुरक्षित निकास, हताहतों की संख्या कम करने तथा जल्द से जल्द पूरी जगह को खाली कराने के लिए मेट्रो कर्मचारियों की कुशलता को परखने के लिए मेट्रो अधिकारियों द्वारा अलग-अलग परिदृश्य बनाए गए थे। 

मॉक ड्रिल को बेहतर करने के लिए वरिष्ठ अधिकारी, परिचालन विभाग के कर्मचारी, ड्यूटी स्टेशन कंट्रोलर, सीआरए (ग्राहक संबंधी सहायक), सीएफए (ग्राहक सुविधा सहायक) और सुरक्षाकर्मी शामिल थे। बता दें, मेट्रो मॉक ड्रिल का आयोजन समय-समय पर पहले भी करता आया है। 

 

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