लखनऊ : खरगापुर की सार्वजनिक जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए चलेगा बुलडोजर, हाई कोर्ट की सख्ती के बाद कार्रवाई
लखनऊ के खरगापुर गांव में सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए हाई कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम और राजस्व विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

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HighLights
खरगापुर की सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू।
हाई कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने उठाया कदम।
राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कानूनी प्रक्रिया जारी।
विधि संवाददाता, लखनऊ। खरगापुर गांव की सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण के मामले में हाई कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम और राजस्व विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ को बताया कि संबंधित अतिक्रमणकारियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत विधिक कार्रवाई शुरू की गई है।
कोर्ट ने अनुपालन शपथपत्र पर संज्ञान लेते हुए अवमानना याचिका निस्तारित कर दी। हालांकि, आदेश के वास्तविक अनुपालन में देरी होने पर याची को दोबारा अवमानना कार्यवाही शुरू कराने की छूट दी गई है।
न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने यह आदेश विनय मिश्रा की ओर से नगर आयुक्त और तहसीलदार के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका पर दिया। याचिका में आरोप था कि 19 मार्च 2026 को हाई कोर्ट ने खरगापुर स्थित संबंधित भूमि का निरीक्षण करने और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण मिलने पर उसे हटाने का आदेश दिया था।
क्या लगाए आरोप?
राजस्व अभिलेखों में संबंधित जमीन तालाब, ऊसर और बंजर के रूप में दर्ज है। कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने से पहले प्रभावित लोगों को सुनवाई का उचित अवसर देने का भी निर्देश दिया था। याची का आरोप था कि आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद अवमानना कोर्ट ने नगर आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
नगर आयुक्त ने अनुपालन शपथपत्र दाखिल कर बताया कि कथित अतिक्रमणकारियों के खिलाफ धारा 67 के तहत कार्यवाही शुरू कर दी गई है। किसी अन्य कानूनी बाधा के अभाव में इस कार्रवाई को प्राथमिकता के आधार पर 90 दिन में पूरा करने का लक्ष्य है। धारा 67 की कार्यवाही में अंतिम निर्णय के बाद ही विवादित भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
पांच माह की मिली मोहलत
कोर्ट ने फिलहाल अवमानना याचिका निस्तारित कर दी, लेकिन स्पष्ट किया कि यदि 19 मार्च के आदेश का पांच माह के भीतर उसकी वास्तविक भावना के अनुरूप पालन नहीं होता है तो याची दोबारा कोर्ट का रुख कर सकता है। ऐसे में अब संबंधित विभागों पर समय सीमा में कार्रवाई पूरी करने का दबाव है।
