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लखनऊ में 70 हजार पीएनजी उपभोक्ताओं का डेटा लीक, साइबर ठगों का नया जाल

Published: Sun, 13 Sep 2026 08:58 PM (IST)

लखनऊ में 70 हजार से अधिक पीएनजी उपभोक्ताओं का डेटा लीक होने की आशंका है, जिससे साइबर ठग उन्हें बकाया बिल और मीटर अपडेट के बहाने निशाना बना रहे हैं।

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HighLights

  1. लखनऊ में 70 हजार से अधिक पीएनजी उपभोक्ताओं का डेटा लीक।

  2. साइबर ठग बकाया बिल, मीटर अपडेट के नाम पर कर रहे ठगी।

  3. फर्जी ऐप डाउनलोड कराकर बैंक खातों से लाखों रुपये निकाले।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) बिल बकाया और मीटर अपडेट के नाम पर साइबर ठग उपभोक्ताओं को निशाना बना रहे हैं। गैस कंपनी का प्रतिनिधि बनकर पहले फोन या मैसेज करते हैं। कनेक्शन बंद होने का डर दिखाकर मोबाइल में एप डाउनलोड कराते हैं। एप के जरिये उपभोक्ता के बैंक खाते तक पहुंचकर रुपये निकाल लेते हैं।

लखनऊ में ऐसे मामलों में करीब 50 लाख रुपये की ठगी हो चुकी है। अब भी उपभोक्ताओं को ठगों का संदेश पहुंच रहा है। इसी का नतीजा है कि पीएनजी ने राजधानी के अपने करीब एक लाख उपभोक्ताओं को अलर्ट किया है।

ऐसे में सवाल उठता है कि उपभोक्ताओं का मोबाइल नंबर ठगों तक कैसे पहुंचा? क्या कंपनी के किसी कर्मचारी ने डाटा लीक किया या किसी थर्ड पार्टी के पास डाटा था और वहां से लीक हो गया।

हालांकि, साइबर क्राइम पुलिस डाटा लीक होने की दिशा में जांच शुरू कर दी है। साइबर ठगों तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती है। इस रिपोर्ट में पढ़िए कि ठग कैसे उपभोक्ताओं को ठगते हैं? उनसे कैसे बच सकते हैं? अब तक हुई ठगी के प्रमुख मामले...

70 हजार उपभोक्ताओं का डाटा लीक होने की आशंका

पीएनजी के 70 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं का डाटा लीक होने की आशंका सामने आई है। साइबर ठग ग्रीन गैस का नाम और लोगो इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं को संदेश भेजते हैं। पिछले महीने का बकाया बिल और मीटर अपडेट नहीं होने पर रात साढ़े आठ बजे गैस कनेक्शन काटने की चेतावनी देते हैं।

कनेकशन कटने से बचाने के लिए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने और बिल अपडेट करने को कहते हैं। इसके बाद ठग उपभोक्ताओं को संदिग्ध एपीके (एंड्रायड पैकेज किट) फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं।

जैसे ही उपभोक्ता वह फाइल डाउनलोड करता है, ठगों की पहुंच उसके मोबाइल तक पहुंच जाती है। उसके बाद वह मोबाइल में डाउनलोड यूपीआई, नेट बैंकिग आदि तक पहुंचकर बैंक खाते खाली कर देते हैं।

एपीके फाइल डाउनलोड होने पर साइबर अपराधियों को मोबाइल की संवेदनशील जानकारी और गतिविधियों तक अनधिकृत पहुंच मिल सकती है। इससे ओटीपी, संदेश, बैंकिंग संबंधी जानकारी और निजी डाटा का दुरुपयोग कर आर्थिक ठगी की जा सकती है। जिन उपभोक्ताओं के पास अभी ऐसा संदेश नहीं पहुंचा है, उन्हें भी सतर्क रहने की जरूरत है। साइबर क्राइम थाने की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इतने बड़े स्तर पर उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर ठगों तक कैसे पहुंचे? कंपनी के भीतर से डाटा लीक होने की आशंका समेत अन्य पहलुओं पर जानकारी जुटाई जा रही है।

- किरन यादव, एडीसीपी क्राइम

साइबर ठगों से ऐसे बचें

  • गैस कंपनी के नाम से आए अनजान फोन या मैसेज पर भरोसा न करें।
  • मीटर अपडेट के नाम पर भेजे लिंक या एपीके फाइल को डाउनलोड न करें।
  • ओटीपी, यूपीआइ पिन, बैंक डिटेल या डेबिट-क्रेडिट कार्ड की जानकारी साझा न करें।
  • किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस न दें।
  • बिल और मीटर की जानकारी गैस कंपनी के अधिकृत एप, वेबसाइट या कार्यालय से ही जांचें।
  • ठगी होने पर तत्काल बैंक को सूचना दें और 1930 पर शिकायत करें।
  • संदिग्ध संदेश मिलने पर उसे हटाएं नहीं। मोबाइल नंबर और पूरे संदेश का स्क्रीनशाट सुरक्षित रखें।
  • संदेश को लखनऊ पुलिस की अपराध शाखा की संगठित अपराध हेल्पलाइन 7839861034 पर भेजें।
  • यदि एपीके फाइल डाउनलोड कर ली है तो तुरंत वाई-फाई और मोबाइल इंटरनेट बंद कर दें।
  • कोई अनुमति न दें। सुरक्षित दूसरे उपकरण से महत्वपूर्ण पासवर्ड बदलें।
  • बैंक खाते, यूपीआई और अन्य लेनदेन की जांच करें। संदिग्ध लेनदेन मिलने पर बैंक को तुरंत सूचना दें।
  • पैसे की ठगी होने पर तत्काल 1930 पर काल करें और www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
  • साइबर सुरक्षा केंद्र की वेबसाइट www.csk.gov.in से उपलब्ध सुरक्षा उपकरण की मदद से मोबाइल की जांच करें।

पीएनजी बिल बकाया और मीटर अपडेट के नाम पर हुईं ठगी

गोमतीनगर: विनीतखंड-6 निवासी भरत सिंह को मकान मालकिन का संदेश मिला कि ग्रीन गैस बिल अपडेट नहीं हुआ है। इसके बाद एक व्यक्ति ने खुद को ग्रीन गैस का कर्मचारी बताते हुए लिंक भेजा और 12 रुपये अतिरिक्त भुगतान करने को कहा। लिंक पर कार्ड की जानकारी भरते ही खाते से 96,249 रुपये निकल गए।

गोमतीनगर: एल्डिको एलिगेंस निवासी सुबोध चंद्र अग्रवाल को गैस बिल बकाया होने का झांसा देकर एप डाउनलोड कराया गया। उनके तीन खातों से चार बार में 31.84 लाख रुपये निकाल लिए गए।

जानकीपुरम विस्तार: राकेश चंद्र श्रीवास्तव के मोबाइल पर गैस कंपनी के नाम से मीटर अपडेट का एप भेजा गया। एप डाउनलोड करने के बाद खाते से करीब 3.25 लाख रुपये निकल गए।

कानपुर रोड: पवन कुमार को मीटर अपडेट नहीं कराने पर गैस कनेक्शन बंद करने की धमकी दी गई। वाट्सएप पर भेजे एप से 13 रुपये शुल्क जमा कराने के बाद खाते से 6,38,767.64 रुपये निकाल लिए गए।