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आतंकी हमले का सायरन बजा और दौड़ पड़ीं सुरक्षा एजेंसियां, लखनऊ में तीन दिवसीय आतंकवाद निरोधी अभ्यास

Published: Sat, 19 Sep 2026 09:18 PM (IST)

राजधानी लखनऊ में 16 से 18 सितंबर तक एनएसजी, एटीएस, पुलिस और जिला प्रशासन ने तीन दिवसीय आतंकवाद निरोधी अभ्यास किया।

माकड्रिल के दौरान सुरक्षाकर्मी। पुलिस

माकड्रिल के दौरान सुरक्षाकर्मी। पुलिस

जागरण संवाददाता, लखनऊ। राजधानी में अचानक किसी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान पर आतंकी हमला हो जाए, लोग बंधक बना लिए जाएं और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाना हो तो पुलिस कितनी तेजी से मोर्चा संभालेगी? ऐसी ही आपात स्थिति की गुरुवार को लाइव रिहर्सल की गई।

16 से 18 सितंबर तक राजधानी के प्रमुख संस्थानों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों में एनएसजी, एटीएस, लखनऊ पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने आतंकवाद निरोधी अभ्यास किया। इस दौरान बंधक बनाए जाने, संदिग्धों की तलाश और सामरिक बचाव अभियान जैसे हालात पैदा कर सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों को परखा गया।

पहली प्रतिक्रिया टीम के रूप में पुलिस

अभ्यास के दौरान सबसे पहले स्थानीय पुलिस को मौके पर पहुंचने वाली पहली प्रतिक्रिया टीम के रूप में सक्रिय किया गया। सूचना मिलते ही पुलिस ने घटनास्थल के चारों ओर घेरा बनाने, लोगों की आवाजाही नियंत्रित करने और आमजन को सुरक्षित रखने की कार्रवाई का अभ्यास किया।

साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि आपात स्थिति में एंबुलेंस, दमकल और विशेष बलों के वाहनों के लिए रास्ता पूरी तरह खाली रहे। इसके बाद घटनास्थल के पास संयुक्त घटना नियंत्रण केंद्र बनाया गया।

यहां पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, दमकल, यातायात पुलिस, एसडीआरएफ, खुफिया एजेंसियों और संबंधित प्रतिष्ठान के सुरक्षा अधिकारियों के बीच वास्तविक समय में समन्वय का अभ्यास हुआ। यानी मौके पर अलग-अलग टीमें अपनी कार्रवाई करने के बजाय एक ही नियंत्रण व्यवस्था से जुड़कर काम करेंगी।

एनएसजी के पहुंचने तक पुलिस ने बनाया ग्रीन कॉरिडोर

आतंकी हमले जैसी स्थिति में विशेष बलों के घटनास्थल तक जल्द पहुंचने और घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए स्थानीय पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाने का भी अभ्यास किया। पायलट वाहनों और यातायात डायवर्जन के जरिये विशेष बलों के वाहनों के लिए रास्ता खाली कराया गया। इसका उद्देश्य हमले की स्थिति में एक-एक मिनट की बचत करना रहा।

अभ्यास में बंधक बनाए गए लोगों को सुरक्षित निकालने और संदिग्ध स्थानों की तलाशी का भी पूर्वाभ्यास हुआ। एनएसजी और एटीएस ने अलग-अलग खतरे की स्थिति के अनुसार अपनी सामरिक तैनाती और बचाव कार्रवाई को परखा।

तो सूचना तंत्र संभालेगा मोर्चा

अभ्यास सिर्फ हथियारबंद हमले तक सीमित नहीं रहा। भीड़ में भगदड़ और अफवाह फैलने की स्थिति से निपटने की भी रिहर्सल की गई। यातायात मार्गों को व्यवस्थित करने, लोगों की आवाजाही नियंत्रित करने और सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं का तत्काल खंडन करने की व्यवस्था परखी गई। इसके लिए अधिकृत प्रवक्ताओं और त्वरित आधिकारिक सूचना जारी करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।

तीन दिन चले इस अभ्यास का मकसद आतंकी हमले या किसी बड़ी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया का समय कम करना और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल मजबूत करना रहा। सरकारी भवनों, अस्पतालों, परिवहन केंद्रों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों में संभावित कमजोरियों की पहचान कर निवारक सुरक्षा उपायों की समीक्षा की गई।