लखनऊ, जागरण संवाददाता। कोरोनावायरस के संक्रमण काल में खुद को सुरक्षित रखने के लिए लोगों ने कई तरह के जतन किए। इसमें घरेलू नुस्खों में गिलोय के काढ़े का सेवन भी शामिल रहा। इस दौरान गिलोय के अत्यधिक सेवन की वजह से लोगों में लिवर संबंधी बीमारियां भी देखी गईं। इसका पता नौ राज्यों के 13 चिकित्सा संस्थानों के संयुक्त शोध में हुआ है। इन संस्थानों में कि‍ंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) का गैस्ट्रोमेडिसिन विभाग भी शामिल है। अमेरिकन एसोसिएशन फार द स्टडी आफ लिवर डिजीज के जनरल हेपैटोलाजी कम्युनिकेशन में प्रकाशित शोध पत्र में यह बात सामने आई है।

इस शोध में अलग-अलग संस्थानों से 25 से 76 वर्ष की आयु के 43 मरीजों का डाटा शामिल किया गया। इसमें अधिकतर मरीजों ने औसतन 46 दिनों तक गिलोय का सेवन जूस या चूर्ण के रूप में किया था। केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के तहत गैस्ट्रोएंटरोलाजी यूनिट एडिशनल प्रोफेसर डा. अजय कुमार पटवा ने बताया कि गिलोय एक प्रकार का औषधीय पौधा होता है। जो बेल (लताओं) के रूप में फैलता है। आयुर्वेदिक दवाओं में इसका इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद विशेषज्ञ गिलोय से तैयार दवा और जूस से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के दावे कर रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर में जब रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की बात आई तो बड़ी संख्या में लोगों ने बिना आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के गिलोय का सेवन शुरू कर दिया। गिलोय की सही खुराक और समय का ध्यान नहीं दिये जाने के कारण कई लोगों में लिवर संबंधी बीमारी उत्पन्न हो गई।

डा. अजय कुमार पटवा के मुताबिक बिना विशेषज्ञ की सलाह के गिलोय के सेवन से हानिकारक तत्व लिवर में अधिक पहुंचे। लिवर की बायोप्सी जांच में लिवर के महत्वपूर्ण एंजाइम एसजीओटी और एसजीपीटी में भी गड़बड़ी पाई गई। कुछ मरीजों के लिवर में सूजन भी देखी गई है। कई मरीज पीलिया की चपेट में आ गए। उन्होंने बताया कि चार मरीज एक्यूट लिवर फ्ल्योर में चले गए। इलाज के दौरान चार मरीजों ने दम भी तोड़ा। मरीजों को कम से कम 30 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत पड़ी।

Edited By: Anurag Gupta