विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

भूमि अधिग्रहण में लापरवाही की जांच करेगी उच्च स्तरीय कमेटी, LDA पर लगा ढाई लाख का जुर्माना

Published: Mon, 16 Mar 2026 02:27 PM (IST)

लखनऊ विकास प्राधिकरण की प्रबंध नगर आवासीय योजना में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में लापरवाही सामने आई है।

News Article Hero Image
timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, लखनऊ। हरदोई-सीतापुर बाईपास के पास 2500 एकड़ में आकार लेने वाली लखनऊ विकास प्राधिकरण की प्रबंध नगर आवासीय योजना 20 साल बाद फिर सुर्खियों में है।

अपर जिलाधिकारी न्यायालय ने एलडीए की आवासीय योजना के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि से जुड़े मामलों में प्रतिकर बढ़ाने का आदेश दिया था।

इस आदेश के विरुद्ध अपील दाखिल करने में अधिकारियों ने देरी किया। ऐसे में हाई कोर्ट ने अपील तो स्वीकार कर लिया है, लेकिन देरी के लिए एलडीए पर ढाई लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

एलडीए उपाध्यक्ष ने भूमि अधिग्रहण मामले में लापरवाही की जांच उच्च स्तरीय समिति को सौंपी है। अब जांच कमेटी पूरे मामले में यह पता लगाएगी कि किन अधिकारियों की लापरवाही से प्राधिकरण को आर्थिक नुकसान हुआ है साथ ही भूमि अधिग्रहण के संबंध में भी क्या लापरवाही बरती गई है।

जांच के बाद दोषी मिलने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी होगी। जांच कमेटी दो सप्ताह में रिपोर्ट प्राधिकरण उपाध्यक्ष को सौंपेगी।

डेढ़ साल बाद दाखिल की गई अपील

असल में, एलडीए की प्रबंध नगर आवासीय योजना के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि से जुड़े मामले में न्यायालय ने प्रतिकर बढ़ाने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की जानी थी, लेकिन अपील तय समय के बजाए करीब डेढ़ साल बाद दाखिल की गई।

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया, अपर सचिव सीपी त्रिपाठी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई है, जो पूरे प्रकरण की समीक्षा करेगी करके यह देखेगी कि आखिर किन स्तरों पर चूक हुई।

जांच समिति में अपर सचिव त्रिपाठी के अलावा संयुक्त सचिव (अर्जन) एसपी सिंह, विशेष कार्याधिकारी संगीता राघव, उपजिलाधिकारी विराग करवरिया और चकबंदी अधिकारी हेमचंद्र तिवारी को सदस्य बनाया गया है। यह समिति अभिलेखों की जांच करेगी और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी।

प्रबंध नगर योजना

एलडीए ने आवासीय योजना में 450 बीघा भूमि का बैनामा करा चुका है और 105 बीघा भूमि पर कब्जा भी ले चुका है। किसानों को करीब 300 करोड़ रुपये का मुआवजा भी दिया गया है।

इस याेजना में बुनियादी ढांचा विकसित किया जाना है, जहां चौड़ी सड़कें, ग्रीन बेल्ट, पार्क, स्कूल, अस्पताल, सामुदायिक केंद्र आदि का निर्माण होना है। यह योजना जमीन अधिग्रहण, मुआवजे और पर्यावरण मंजूरी जैसे विवादों के कारण अटकी हुई है।