लखनऊ [जितेंद्र उपाध्याय]। पर्यावरण में आए बदलाव का असर भूमिगत पानी पर भी पड़ रहा है। वर्षा जल संचयन की कोशिशों के बीच कृषि क्षेत्र में पानी की बचत करने की मुहिम के तहत कृषि विभाग किसानों को जल संरक्षण के लिए जागरूक कर रहा है। इसी के तहत एक नया अध्याय जुडऩे जा रहा है। किसानों को 'लेजर लेवलर मशीन के सहारे जल संरक्षण और अधिक उत्पादन का पाठ पढ़ाया जाएगा।

कृषि विशेषज्ञ डॉ.सीपी श्रीवास्तव ने बताया कि 'लेजर लेवलर मशीन के प्रयोग से न केवल 20 से 25 फीसद सिंचाई के पानी की बचत होगी बल्कि कृषि उत्पादन में भी 15 से 20 फीसद की बचत होगी। इसके प्रयोग के लिए किसानों को जागरूक किया जाता है।

क्या है 'लेजर लेवलर: 'लेजर लेवलर लेजर तकनीक से बना यंत्र है जो टैक्टर के सहारे चलता है। इसका लेजर सिस्टम खेत के लेबल के बारे में बताने के साथ ही टैक्टर के हाईड्रोलिक यूनिट को नियंत्रित भी करता है। ट्रैक्टर में लगा नियंत्रण बॉक्स लेबल करने वाली प्लेट को स्वत: नियंत्रित करके ऊंची-नीची जमीन को समतल कर देता है। इसके संचालन के लिए 50 हार्सपावर के ट्रैक्टर की आवश्यकता होती है। बीहड़ और ऊंचे-नीचे खेतों के लिए यह प्रयोग किया जा सकता है।

कम हो रहे पेड़, सूख रही धरती: सरकारी आंकड़ों के अनुसार लखनऊ का कुल क्षेत्रफल 2528 वर्ग किलोमीटर है जबकि मात्र 5.1 फीसद ही वन क्षेत्र है। कल के लिए जल के संयोजक सीबी पांडेय ने बताया कि एक ओर जहां पेड़ों की संख्या कम हो रही है वहीं भूमिगत जल स्तर नीचे जा रहा है। सूचना अधिकार से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश के 819 ब्लॉकों में 85 में भूमिगत जल का स्तर चिंताजनक है जबकि 214 मुहाने पर हैं। अकेले राजधानी में आठ ब्लॉकों की 1215 ग्राम पंचायतों में दो हजार से अधिक जल स्रोत हैं जिनमे आधे से अधिक लुप्त हो गए हैं। चिनहट ब्लॉक में तो खेती के लिए जमीन ही नहीं बची है।

उप कृषि निदेशक डा.सीपी श्रीवास्तव ने बताया कि जल संरक्षण और अधिक उत्पादन के लिए 'लेजर लेवलरÓ मशीन किसानों के लिए लाभ दायक है। कृषि विभाग की वेबसाइट में पंजीकृत किसान या किसानों का समूह मशीन के लिए आवेदन कर सकता है। तीन लाख कीमत वाली मशीन पर किसानों को 50 फीसद अनुदान भी दिया जाएगा।

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