लौकी की खेती ने बदली लखीमपुर के किसान की तकदीर, 37000 खर्च कर कमाए 94 हजार रुपये
लखीमपुर के किसान डिम्पल सिंह ने उद्यान विभाग की सहायता से लौकी की खेती कर 94,800 रुपये का शुद्ध लाभ कमाया।
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लौकी की खेती ने बदली किसान की आमदनी।
HighLights
किसान डिम्पल सिंह ने लौकी की खेती से 94,800 रुपये कमाए।
उद्यान विभाग ने उन्नत बीज और तकनीकी सहायता प्रदान की।
उनकी सफलता ने अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है।
संवाद सूत्र, लखीमपुर। परंपरागत तरीके से बागवानी और सब्जी की खेती करने वाले बिजुआ के ग्राम प्रतापटांडा निवासी किसान डिम्पल सिंह के लिए उद्यान विभाग की योजना नई संभावनाएं लेकर आई। विभाग की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के तहत शाकभाजी कार्यक्रम में पंजीकरण कराया।
योजना के अंतर्गत उन्हें 0.6 हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए लौकी का उन्नत बीज और फसल की तुड़ाई के बाद उपज सुरक्षित रखने के लिए नौ प्लास्टिक क्रेट उपलब्ध कराए गए।
डिम्पल सिंह ने बताया कि विभाग से मिले बीएसएस-333-प्रतीक प्रजाति के 0.9 किलोग्राम बीज को विभागीय तकनीक के अनुसार तैयार कर खेत में रोपा गया।
फसल की देखरेख में भी उद्यान विभाग के कर्मचारियों ने समय-समय पर दूरभाष और खेत पर पहुंचकर तकनीकी सलाह दी। उन्नत बीज, नई बीज रोपण तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन का परिणाम उत्पादन में दिखाई दिया। उन्हें करीब 165 क्विंटल लौकी की उपज मिली।
स्थानीय बाजार में उपज बेचने पर किसान को 1.32 लाख रुपये की आय हुई। खेत की तैयारी, बीज रोपण और फसल की तुड़ाई तक कुल 37,200 रुपये खर्च हुए। खर्च निकालने के बाद उन्हें 94,800 रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई।
डिम्पल सिंह के मुताबिक, उद्यान विभाग उनके लिए खेती में आगे बढ़ने का उत्प्रेरक बना है। लौकी की खेती से उत्साहित होकर अब वह अन्य शाकभाजी फसलों की खेती में भी रुचि ले रहे हैं।
उनकी सफलता से आसपास के किसानों में भी सब्जी की उन्नत खेती के प्रति जागरूकता बढ़ी है। वह अन्य किसानों के साथ उद्यान विभाग से तकनीकी जानकारी लेकर शाकभाजी का उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में हैं।
उद्यान विभाग से जुड़कर किसान बढ़ा रहे आय
उद्यान विभाग की योजनाओं का उद्देश्य किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर शाकभाजी उत्पादन बढ़ाना है। डिम्पल सिंह ने विभागीय मार्गदर्शन में लौकी की खेती कर बेहतर उत्पादन और आय प्राप्त की है। ऐसे किसानों की सफलता आसपास के कृषकों को भी आधुनिक बागवानी अपनाने के लिए प्रेरित करती है। -मृत्युंजय सिंह, जिला उद्यान अधिकारी।
