लखनऊ। अदालत ने सीओ जियाउल हक हत्याकांड की जांच दोबारा शुरू करने के आदेश देकर सीबीआइ की मुश्किल बढ़ा दी है। सीबीआइ के सामने दोहरी चुनौती है। या तो वह अपनी जांच को प्रमाणित करे या फिर अदालत द्वारा उठाये गये सवालों का जवाब हासिल करे। उम्मीद है कि जल्द नई टीम का गठन कर नये सिरे से जांच शुरू होगी।

सीओ की पत्नी परवीन आजाद का सीबीआइ पर भरोसा नहीं है। परवीन का दो टूक कहना है कि शुरुआती दौर से ही जांच के साथ खिलवाड़ किया गया। वैसे पहले भी सीबीआइ की कई मामलों में किरकिरी हुई है। जियाउल हक हत्याकांड की जांच की अंतिम रिपोर्ट खारिज होने से पहले सीबीआइ एनआरएचएम घोटाले के आरोपी डॉ. सचान की मौत के मामले में भी झटका खा चुकी है। कोर्ट ने जियाउल हक की जांच रिपोर्ट को सतही बताकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कुंडा सर्किल के आस्थान गांव के दंगों और गोटनी घाट के अवैध बालू खनन मामलों की जांच जियाउल हक ने की थी। उनकी पत्नी ने कहा कि इन जांच के चलते कुछ लोग उनके पति से खार खाए थे। यह आरोप लगाने के बावजूद सीबीआइ ने जांच में इस दिशा में कोई पड़ताल नहीं की। सीबीआइ ने मंत्री रघुराज प्रताप सिंह का तो पालीग्राफ टेस्ट कराया, लेकिन बाकी किसी की जांच नहीं की। खनन माफिया और आरोपियों के अन्तर्सम्बंधों की जांच आदि कई ऐसे मसले हैं जिन्हें सीबीआइ ने छुआ तक नहीं। यहां तक कि हथिगवां के तत्कालीन एसओ मनोज कुमार शुक्ल की रिपोर्ट पर आरोप पत्र दाखिल किया, लेकिन उनका बयान तक दर्ज नहीं किया। अदालत ने सवाल उठाया है कि जब सीओ पर हमला हुआ तो पुलिस बल मौजूद था तो फिर हमलावरों पर फायरिंग या बल प्रयोग क्यों नहीं किया गया।

अब सीबीआइ को इन सभी बिंदुओं पर स्थिति साफ करनी है। सीओ की पत्नी परवीन आजाद जब सीबीआइ की भूमिका पर ही सवाल उठा चुकी हैं तो ऐसे में जांच एजेंसी को साख बचाने के लिए न केवल जांच के लचर बिंदुओं पर उठे सवालों के जवाब तलाशने हैं, बल्कि उसके लिए फिर से एक-एक लोगों से पूछताछ और साक्ष्यों की तलाश करनी है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ जांच में शामिल पिछले किसी अधिकारी को नहीं रखेगी। शीघ्र नई टीम का गठन होगा। परवीन आजाद ने स्पेशल जांच टीम गठित करने की भी मांग की है।

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