लखनऊ, जेएनएन। भारतीय संस्कृति में त्योहार न केवल हमें हमारी परंपराओं से परिचित कराते हैं बल्कि हमारे अंदर आस्था और विश्वास जगाने का भी काम करते हैं। यही वजह है कि विकास के दौर में भी ईश्वर के प्रति हमारी श्रद्धा कम नहीं हुई है। धार्मिक त्योहारों का उल्लास वैसे तो धनतेरस से शुरू होगा, लेकिन सुहागिनों का पर्व करवा चौथ पर चांद के दीदार की बेकरारी त्योहार के उल्लास में चार चांद लगा देते हैं। राजधानी का हर बाजार त्योहार के रंग में रंग चुका है। पौराणिक ग्रंथों के साथ ही सामाजिक मान्यताएं हमे अपने धर्म के प्रति धर्मनिष्ठ बनाती हैं। इसी मंशा के चलते हम हर त्योहार को अपने ढंग से मनाने में आगे रहते हैं। 

ऐसे करें पूजन

करवाचौथ के व्रत में शिव पार्वती, कार्तिकेय, गणेश और चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के दिन शाम के समय चंद्रमा को अघ्र्य देकर ही व्रत खोला जाता है। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास या सास की उम्र के समान किसी सुहागिन के पैर छूकर सुहाग की सामग्री भेंट करना उत्तम होता है। छत या आंगन में गाय के गोबर से लीपकर और स्वास्तिक बनाकर पूजन करना चाहिए। निर्जला व्रत रहीं महिलाएं उगते चंद्र को अघ्र्य देकर सुहाग की दीर्घायु की मंगलकामना करेंगी। चंद्रोदय केएक घड़ी (24 मिनट) के भीतर ही चंद्र को अघ्र्य देकर और गौरी गणेश का पूजन कर चौथ माई के व्रत का पारण कर लेना उत्तम होगा।

धातु व मिट्टी के करवे

मान्यता है कि धातु से बने करवे से चौथ का पूजन करना फलदायी होता है, लेकिन यथा शक्ति मिट्टी के करवे से पूजन भी किया जा सकता है। मान्यता है कि इस दिन के बाद से ही ठंड शुरू हो जाती है। कहा जाता है कि करवे की टोटी से ही जाड़ा निकलता है और धीरे-धीरे वातावरण में ठंड का एहसास बढ़ जाता है।

 

पूजा का शुभ मुहूर्त 

पं.राधेश्याम शास्त्री ने बताया कि 17 अक्टूबर को सुबह 6:48 बजे से करवा चौथ का मान शुरू हो जाएगा। कृतिका नक्षत्र दोपहर 3:51 बजे तक रहेगा। इसके बाद रोहिणी नक्षत्र लग जाएगा। चंद्रमा अपने ही रोहिणी नक्षत्र के उच्च राशि में है। ऐसे में चंद्र का पूजन स्त्रियों के लिए पति और बच्चों के लिए अच्छा रहेगा। करवाचौथ का पूजन चंद्रोदय के पहले करना उत्तम होगा। चंद्रोदय 8:03 बजे होगा। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 3:51 से रात्रि 8:03 बजे तक है। इसके बाद अघ्र्य देना चाहिए।

ये है मान्यता 

मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति को न केवल लंबी आयु मिलती है, बल्कि वह निरोगी भी रहता है। साथ ही पति-पत्नी के बीच असीम प्रेम होता है। माना जाता है कि सबसे पहले यह व्रत शक्ति स्वरूपा देवी पार्वती ने भोलेनाथ के लिए रखा था। इसी व्रत से उन्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हुई थी। इसीलिए सुहागिनें अपने पतियों की लंबी उम्र की कामना से यह व्रत करती हैं और देवी पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं।

चांद के दीदार के साथ तैयार है बाजार 

चांद के दीदार का पर्व 17 अक्टूबर को बाजार तैयार हैं। करवा चौथ पर पूजन सामग्री के साथ ही डिजाइनर करवे भी बाजार में मौजूद हैं। चांदी के करवे के साथ ही सोने के पानी चढ़े करवे भी बाजार में मौजूद है। चौक के सिद्धार्थ जैन ने बताया कि हर रेंज के आकर्षक करवे बनवाए गए हैं। आलमबाग के रामकुमार वर्मा ने बताया कि महिलाओं के लिए श्रृंगार का सामान भी बनाया गया है। कम रेंज में आकर्षक आभूषण महिलाओं को रास आएंगे। चूरा, लावा के साथ ही खिलौने भी बाजार में मौजूद हैं। मेहदी लगवाने के साथ ही ब्यूटी पार्लर की दुकानों पर भी भीड़ दिखने लगी है। 

 

धनतेरस 25 को

25 अक्टूबर को धनतेरस से उत्सव का आगाज होगा। इस दिन नए समान के साथ ही धातु से बने उत्पादों को खरीदने का प्रावधान है। पं.जितेंद्र शास्त्री ने बताया कि मान्यता है कि इस दिन नये सामान खरीदने से वर्षभर नया उल्लास बना रहता है। इसी दिन हनुमान की जयंती भी मनाई जाएगी। 26 अक्टूबर को छोटी दीपावली मनाई जाएगी इस दिन एक दीपक घूरे पर रखा जाता है। इसके अगले दिन 27 अक्टूबर को दीपावली होगी। इस दिन गणेश-लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा-अर्चना होती है। मां लक्ष्मी के आह्वान के लिए लोग घरों को रोशनी से सजाते हैं। कहा जाता है कि भगवान श्रीराम लंका के राजा रावण को मारकर अयोध्या वापस आए थे और उनके आने की खुशी में लोगों ने घरों के सामने घी के दीपक जलाकर उनका स्वागत किया था और पूरी अयोध्या में खुशियों के उल्लास में डूब गई थी। इसी मान्यता के चलते हर वर्ष दीपावली मनाई जाती है। दीपावली के दूसरे दिन 28 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा होगी। गाय के गोबर से भगवान गोवर्धन को बनाया जाता है। श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी बचाने के इस दिन भी लोग दीपक जलाकर खुशियां मनाते हैं।

भइया दूज 29 को

पं.शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि  गोवर्धन पूजा के अगले दिन 29 अक्टूबर को भइया दूज होगी। इस दिन भाई बहन के घर जाकर टीका लगवाता है। मान्यता है कि इस दिन बहन के घर जाने वाले भाई के सामने यम भी नहीं पड़ते। सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा वर्तमान समय में भी आस्था और विश्वास के साथ कायम है।

 

दीपावली का शुभ मुहूर्त

27 अक्टूबर को दीपावली है। इस दिन मां लक्ष्मी का विधि विधान से आह्वान करने से उनकी विशेष कृपा मिलती है। पं.राकेश पांडेय ने बताया कि श्रीगणेश के दाहिने मां लक्ष्मी को स्थापित कर विधि विधान से पूजा करनी चाहिए। शाम 6:20 बजे से 8:28 बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त है। लक्ष्मीकारक वृष लग्न होने के कारण गृहस्थ और व्यापारी दोनों के लिए यह मुहूर्त फलदायी होगा। दिन में पूर्वाह्न 11:20 से 12:10 बजे तक व्यापारी पूजन कर सकते हैं। रात्रि 11:20 से 12:14 बजे के बीच भी पूजन कर सकते हैं। इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होगी। मिट्टी की बनी प्रतिमाओं का पूजन उत्तम होता है।

Posted By: Divyansh Rastogi

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