लखनऊ [धर्मेन्द्र मिश्र]। दूसरी लहर में सर्वाधिक मरीजों को अपने यहां भर्ती कर केजीएमयू ने कोरोना मरीजों की जान बचाई थी। यहां पहली लहर में 350 बेड के मुकाबले दूसरी लहर में 900 से अधिक आइसीयू बेड तैयार कर दिए गए थे। अब चुनौती तीसरी जंग से लड़ने की है। इसके लिए तैयारियों की पड़ताल करने दैनिक जागरण की टीम शनिवार को केजीएमयू पहुंची। हमारी टीम ने सबसे पहले पीडियाटिक वार्ड का जायजा लिया। जहां, बुखार, उल्टी-दस्त व दूसरी बीमारियों से ग्रस्त पचासों बच्चे भर्ती थे।

पड़ताल के दौरान यह देखा गया कि लगभग सभी बेड तक आक्सीजन के पोर्ट बने हुए हैं। यानि तीसरी लहर की इमरजेंसी में इनका इस्तेमाल आसानी से हो सकता है। यहां सभी पीडियाटिक वार्ड में कुछ बच्चे भर्ती थे व कुछ बेड खाली पड़े हुए थे। मरीजों के परिवारजन से बात करने पर जानकारी हुई कि उनका इलाज भी सही तरीके से किया जा रहा है। किसी को कोई दिक्कत नहीं है। तीसरी लहर से पहले अन्य बीमारियों से ग्रस्त बच्चों की बेहतर देखभाल व इलाज की व्यवस्था देखना वाकई सुकून पहुंचाने वाला था।

इसके बाद हमारी टीम ने ट्रामा सेंटर में बने पीडियाटिक आइसीयू व एनआइसीयू का रुख किया। ट्रामा सेंटर से प्रवेश करते हुए हम लिफ्ट से चौथे तल पर पहुंचे। यहां पीडियाटिक इमरजेंसी, आइसीयू व एनआइसीयू में किसी अनजान को जाने की मनाही थी। अपना परिचय बताने पर हमें अंदर जाने दिया गया। इमरजेंसी में बच्चों को होल्डिंग एरिया में रखने के लिए करीब तीन वार्ड बने दिखे, जिनमें कुल 47 बेड हैं। बहुत से बच्चे इमरजेंसी में भर्ती थे। इसके बाद हम एनआइसीयू में भी दाखिल हुए। यहां बहुत से नवजात वेंटिलेटर पर थे। कक्ष साफ-सुथरा था। अन्य बेड भी लगाए गए थे, जोकि अभी खाली पड़े थे। इससे आभास हुआ कि तीसरी लहर से जंग की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

अभी की तैयारी पूरी, शासन के निर्देश पर इमरजेंसी इंतजाम को भी तैयार: विभागाध्यक्ष डा. शैली अवस्थी ने कहा कि तीसरी लहर के इलाज से अभी 100 बेड का पीडियाटिक आइसीयू तैयार है। इसके लिए डाक्टरों को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है। तीसरी लहर का स्वरूप कितना बड़ा या छोटा होगा। इस बारे में अभी किसी को कोई अंदाजा नहीं है। अगर जरूरत पड़ी तो शासन के निर्देश पर इमरजेंसी में और बेड, वेंटिलेटर व डाक्टरों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

दूसरी लहर में भी केजीएमयू में थे सर्वाधिक बेड: दूसरी लहर में भी केजीएमयू ने सबसे अधिक मरीजों को भर्ती कर उनकी जान बचाई थी। पहली लहर में यहां 350 आइसीयू बेड के मुकाबले दूसरी लहर में 900 से अधिक बेड की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही 150 से अधिक वेंटिलेटर युक्त बेड भी शामिल थे।

पीडियाटिक आइसीयू में 100 बेड, 20 वेंटीलेटर: केजीएमयू में पीडियाटिक विभाग की विभागाध्यक्ष डा. शैली अवस्थी ने बताया कि हमारे यहां 100 बेड का पीडियाटिक आइसीयू (पीकू) बनाया गया है। इसमें 20 वेंटिलेटर की भी सुविधा है। आक्सीजन के लिए केजीएमयू में अपना खुद का प्लांट है। गौरतलब है कि दूसरी लहर में सर्वाधिक दिक्कत आक्सीजन की ही हुई थी। दूसरी लहर से पहले यहां के पीडियाटिक आइसीयू में सिर्फ 12 बेड थे। जो कि अब बढ़कर 50 हो गए हैं। एचडीयू के भी 50 बेड हैं। इससे पीडियाटिक आइसीयू में कुल बेडों की संख्या 100 हो गई है। इसके लिए 87 डाक्टरों की तैनाती है। इसमें से 12 फैकल्टी मेंबर 75 रेजीडेंट शामिल हैं। पीडियाटिक इमरजेंसी की होल्डिंग एरिया में 47 बेड हैं। वहीं इमरजेंसी वार्ड में बेडों की संख्या करीब 50 है।

Edited By: Rafiya Naz