लखनऊ, जेएनएन। किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (केजीएमयू) बुधवार को अलग तरह की चर्चा में आया। एक तरफ विवि के नए कुलपति की नियुक्ति के लिए राजभवन में मंथन शुरू हुआ तो दूसरी तरफ विवि प्रशासन द्वारा बुलाई गई कार्यपरिषद की बैठक को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इसमें केजीएमयू में समूह ग की भर्ती में धांधली प्रकरण का एजेंडा भी रखा गया है। तत्कालीन कमिश्नर ने अपनी जांच में यह धांधली पकड़ी थी। अब चर्चा है कि वर्षों से डंप पड़ी कार्रवाई की फाइल में फंसे चिकित्सकों को अब क्लीन चिट देने की तैयारी है।

राज्यपाल और चिकित्सा शिक्षा मंत्री से शिकायत की गई है। केजीएमयू के वर्तमान कुलपति का कार्यकाल खत्म हो चुका है। वर्तमान हालात के मद्देनजर कोरोना काल में नए कुलपति की नियुक्ति होने पर उन्हें सेवा विस्तार दिया गया है। नए कुलपति के चयन के लिए रविवार से राजभवन में मंथन शुरू हो गया है। स्क्रीनिंग कमेटी ने राज्यपाल को प्रस्तावित नामों की सूची भेज दी है। इसी बीच आठ जून को प्रस्तावित केजीएमयू में कार्य परिषद की बैठक का एजेंडा लीक हो गया। इसमें कई विवादित मसले भी हैं। सबसे अहम मसला वर्ष 2004 में समूह ग की भर्ती में धांधली का है। शासन से कार्रवाई के लिए आई फाइल वर्षों तक डंप रही।

वर्तमान कुलपति के कार्यकाल खत्म होने के बावजूद बुलाई गई बैठक और इसके एजेंडे को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामला बुधवार को विवि व राजभवन से निकलकर रायबरेली से भी जाकर जुड़ गया। वहां के पुरे देवीलालगंज निवासी पवन मिश्रा ने राज्यपाल व चिकित्सा शिक्षा मंत्री को शिकायती पत्र भेजा। इसमें समूह ग भर्ती धांधली में फंसे चिकित्सकों को क्वीन चिट देने की तैयारी की आशंका जताई है। वर्ष 2012 में केजीएमयू की कुलसचिव ने भी तत्कालीन कमिश्नर की तरफ से भेजी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की अनुशंसा की थी। तब मामला फैक्ट फाइंडिंग कमेटी तक गया था।

अब वर्षों बाद इस विवादित मामला कार्यपरिषद में लाया जा रहा है। भर्ती में फंसे शिक्षक कुलपति के दौड़ में शिकायतकर्ता के मुताबिक भर्ती में फंसे कई शिक्षकों ने केजीएमयू में कुलपति पद के लिए आवेदन किया है। ऐसे में कार्य परिषद में एजेंडा लाकर उन्हेंं राहत देने की तैयारी है। इसके अलावा दूसरे शिक्षकों पर विभिन्न प्रकरणों में कार्रवाई की भी आशंका है। ऐसे में प्रस्तावित ईसी को नए कुलपति की नियुक्ति होने तक निरस्त करने की मांग की गई है।

ईसी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। फिलहाल इसमें हमारा कोई निर्णायक रोल नहीं होता है। मुख्य निर्णायक अध्यक्ष होते हैं। आशुतोष द्विवेदी कुलसचिव- सचिव सदस्य

ईसी यूनिवर्सिटी के एक्ट में इसका जिक्र नहीं है कि सेवा विस्तार के वक्त ईसी की बैठक नहीं की जा सकती है। साथ ही यह भी नहीं है कि कौन से मुद्दे रखना है या नहीं। कार्य परिषद की बैठक नियमानुसार हो रही है। समूह ग भर्ती प्रकरण के मुद्दे पर ईसी की बैठक के बाद ही पक्ष रखा जाएगा। डॉ. सुधीर कुमार सिंह, प्रवक्ता-केजीएमयू 

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