लखनऊ, जेएनएन। बदलती हुई जीवनशैली में महिलाएं देर से शादी कर रही हैं। इसकी वजह से प्रेग्नेंसी में भी रिस्क हो रहा है। लापरवाही करने पर मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है। ऐसे में महिलाओं को 30 वर्ष के बाद प्रेग्नेंसी करने से पहले प्री काउंसिलिंग भी करनी चाहिए। साथ ही समय-समय पर चेकअप करवाते रहना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस पर क्वीनमेरी अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ प्रो. रेखा सचान ने मरीजों को सलाह दीं। 

प्री एक्लेम्शिया और जीडीएम का खतरा 

महिलाओं में प्रेग्नेंसी के लिए सबसे अच्छी आयु 20 से 25 वर्ष तक होती है। इसके बाद से धीरे-धीरे अंडे की क्वालिटी कम होती जाती है। ऐसे में प्रेग्नेंसी करने में सबसे ज्यादा हाई ब्लड प्रेशर की वजह से प्री एक्लेम्शिया और जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा हो जाता है। 

क्या होते हैं रिस्क

प्री एक्लेम्शिया से झटके आने की वजह से गर्भस्थ की मौत भी हो सकती है। वहीं डिलीवरी के पहले एक्लेम्शिया होने पर मां और बच्चे दोनों की मौत हो सकती है। 

हो सकती है प्री टर्म डिलीवरी

नार्मल डिलीवरी की संभावना कम और सिजेरियन की संभावना ज्यादा हो जाती है। 25 वर्ष के बाद पेल्विस ज्वाइंट रिलेक्सेशन कम हो जाता है, जिसकी वजह से नार्मल डिलीवरी की संभावना कम हो जाती है। 35 वर्ष के बाद प्रेग्नेंसी करने में डाउन सिंड्रोम और आनुवांशिक रोगों की आशंका बढ़ जाती है। 

इसका रखें ध्यान 

35 वर्ष के बाद प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच जरूर करवा लेनी चाहिए। हायर सेंटर में करवाएं डिलीवरी। डफरिन अस्पताल की सीएमएस डॉ. लिलि सिंह ने बताया कि हमेशा हायर सेंटर में ही डिलीवरी करवानी चाहिए। जहां किसी भी तरह की इमरजेंसी को हैंडल किया जा सके।

Posted By: Anurag Gupta

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