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लखनऊ में कसमंडी कला विवादित ढांचे की जांच को लेकर एक सप्ताह का अल्टीमेटम, सुहेलदेव आर्मी करेगी सुंदरकांड पाठ

Published: Mon, 25 May 2026 02:00 AM (IST)

मलिहाबाद के कसमंडी कला गांव में दो पुराने ढांचों को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद बढ़ रहा ...और पढ़ें

विवादित ढांचे की जांच को लेकर एक सप्ताह का अल्टीमेटम।

विवादित ढांचे की जांच को लेकर एक सप्ताह का अल्टीमेटम।

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जागरण संवाददाता, लखनऊ। मलिहाबाद के कसमंडी कला गांव में दो पुराने ढांचे को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास स्थित इन ढांचों को लेकर हिंदू व मुस्लिम पक्षों में तनातनी है। इस बीच हिंदू पक्ष के लोगों ने विवादित ढांचे की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) एवं राज्य पुरातत्व निदेशालय से जांच कराने की मांग की है।

लाखन पासी आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी और स्थानीय लोगों ने कहा कि इस पर शासन ने एक सप्ताह में कोई निर्णय नहीं लिया तो वहां पर एक बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

कसमंडी कला गांव के पुराने ढांचे को मकबरा बताते हुए मुस्लिम पक्ष ने शुक्रवार को नमाज पढ़ने का प्रयास किया तो शनिवार को हिंदू पक्ष ने हनुमान चालीसा की अनुमति मांगी थी, जो नहीं मिली। दोनों पक्षों को विवादित ढांचे में किसी तरह की धार्मिक गतिविधि न करने को कहा गया है।

पुलिस व प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। ढांचे के पास पीएसी जवान पहरा दे रहे हैं। चारों तरफ रास्ते को बंद कर दिया गया है। आस-पास किसी को भी जाने के लिए मनाही है।

सुहेलदेव आर्मी मंगलवार को करेगी सुंदरकांड पाठ

ढांचों में नमाज पढ़े जाने के विरोध में सुहेलदेव आर्मी भी उतर आयी है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेश पासी ने घोषणा की है कि मंगलवार को सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ ढांचे में सामूहिक रूप से सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। हालांकि पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी।

समिति करती है निगरानी, ऐसे होती है जांच

किसी पुरातात्विक स्थल या प्राचीन इमारत की जांच के लिए संस्कृति मंत्री की निगरानी में एडवाइजरी कमेटी गठित है। इसमें प्रमुख सचिव वित्त, प्रमुख सचिव नियोजन, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक, पुरातत्व निदेशालय के निदेशक, भारतीय राष्ट्रीय न्यास (इंटैक) के निदेशक, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय व लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष शामिल होंगे

इसके साथ ही, पांच क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, प्रदेश में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सभी इकाइयों (लखनऊ, झांसी, सारनाथ, आगरा, मेरठ आदि) के अधीक्षण पुरातत्वविद सहित 23 सदस्य होते हैं।

इसी समिति को ही किसी इमारत या पुरातात्विक स्थल को नोटिफाई या डीनोटिफाई (अधिसूचित करने या सूची से हटाने) करने व पुरातत्व से संबंधित निर्णय लेने का अधिकार होता है। पुरातत्व निदेशालय की निदेशक रेनू द्विवेदी ने बताया कि अगर किसी की तरफ इस तरह की मांग आती है तो उसके आधार जांच कराई जाती है।

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